माकपा पार्टी कार्यालय में विजय कृष्ण ट्रस्ट को प्रदान किया गया एंबुलेंस:
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आसनसोल :कोरोना काल में जिस तरह से रेड वॉलिंटियर्स ने अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सेवा की थी उससे प्रभावित होकर आज मनुज भौमिक और उनके बेटे मैनाक ने एक एंबुलेंस रेड वॉलिंटियर्स के सदस्यों को प्रदान किया आसनसोल के अपकार गार्डन स्थित माकपा पार्टी कार्यालय में एक कार्यक्रम के दौरान विजय कृष्ण ट्रस्ट के माध्यम से यह एंबुलेंस रेड वॉलिंटियर्स को प्रदान किया गया । भौमिक परिवार ने इस एंबुलेंस की चाबी विजय कृष्ण ट्रस्ट के चेयरमैन तथा आसनसोल नगर निगम के पूर्व मेयर तापस राय और इस संस्था के सचिव पार्थो मुखर्जी को सौंप दिया इस मौके पर मनुज भौमिक पार्थो मुखर्जी जयदीप चक्रवर्ती मैत्रेयी दास सहित माकपा के तमाम कार्यकर्ता और रेड वॉलिंटियर्स उपस्थित थे इस मौके पर अपना वक्तव्य पेश करते हुए मनुज भौमिक ने कहा कि उनके बेटे मैनाक बेंगलुरु में रहते हैं उन्होंने फोन पर रेड वॉलिंटियर्स को एंबुलेंस प्रदान करने का प्रस्ताव दिया मनोज भौमिक ने कहा कि उन्होंने देखा है कि कोरोना काल में किस तरह से रेड वॉलिंटियर्स ने अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सेवा की थी इसलिए जैसे ही उनके बेटे ने यह प्रस्ताव उनके सामने रखा उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया वहीं विजय कृष्ण ट्रस्ट के सचिव पार्थो मुखर्जी ने भौमिक परिवार को धन्यवाद दिया और कहा कि रेड वॉलिंटियर्स में जिस तरह से कोरोना काल में अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों की सेवा की थी वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है उन्होंने कहा कि रेड वॉलिंटियर्स की सेवा की पराकाष्ठा इस बात से समझी जा सकती है कि उनके एक साथी माइकल मुखर्जी और उनका पूरा परिवार कोरोना की भेंट चढ़ गया लेकिन इसके बावजूद भी यह नहीं रुके और उन्होंने लोगों की सेवा जारी रखी । वही इस एंबुलेंस को प्रदान करने की वजह के बारे में बताते हुए मैनाक मुखर्जी ने कहा कि 2018 में कैंसर के कारण उनकी मां की मौत हो गई थी तभी से वह समाज के लिए कुछ करना चाहते थे उन्होंने बताया कि उनकी मां एक परोपकारी महिला थी जो हमेशा लोगों की सेवा करने के लिए तत्पर रहती थी मां की सीख से प्रभावित होकर उन्होंने तभी यह मन बना लिया था कि वह समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं इसके उपरांत जब कोरोना काल में बेंगलुरु में रहते हुए उन्होंने बंगाल में रेड वॉलिंटियर्स के बारे में सुना तो उन्होंने सोचा कि इनकी मदद करनी चाहिए शारीरिक रूप से तो वह इनके साथ नहीं रह सकते क्योंकि वह बेंगलुरु में रहते हैं लेकिन एंबुलेंस प्रदान करके वह एक छोटा सा कदम उठा रहे हैं जिससे कि इनकी मदद हो सके उन्होंने कहा कि भविष्य में भी वह इस तरह के कार्य जारी रखना चाहते हैं














