अखिल भारतीय हिंदी महासभा द्वारा 14 तारीख को आसनसोल के रविंद्र भवन में होगा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन
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आसनसोल :अखिल भारतीय हिंदी महासभा की ओर से 14 तारीख को आसनसोल के रवींद्र भवन में ‘राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महिलाओं का योगदान’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक 6 अलग-अलग सत्रों में चलेगा। प्रेस वार्ता में संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि अखिल भारतीय हिंदी महासभा 1949 से पूरे भारत में समन्वय, एकता और विकास के उद्देश्य से काम कर रही है। इसी कड़ी में अलग-अलग प्रांतों में कार्यक्रम हो रहे हैं और अब बंगाल भी इसका साक्षी बनेगा। संगोष्ठी में केंद्र के 4 मंत्री, राज्य की 25 महिला विधायक, पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री सहित कई गणमान्य लोग शामिल होंगे। इसके अलावा देशभर से महासभा के हजारों कार्यकर्ता भी पहुंचेंगे। शाम को एक सांस्कृतिक सत्र भी रखा गया है जिसमें कलाकारों की प्रस्तुति होगी। पदाधिकारियों ने कहा कि इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य उन महिलाओं के योगदान को सामने लाना है जो घर संभाल रही हैं, नौकरी कर रही हैं और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही हैं। महिला आरक्षण बिल के परिप्रेक्ष्य में भी इस संगोष्ठी का विशेष महत्व है। पिछले 15 दिनों से संगठन के पदाधिकारी पूरे क्षेत्र में 7 विधानसभाओं का दौरा कर कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हैं। इसको लेकर संगठन के राष्ट्रीय सलाहकार ओम नारायण प्रसाद ने प्रेस वार्ता कर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, अखिल भारतीय हिंदी महासभा को लेकर हम कार्यक्रम करने जा रहे हैं तो एक संदेह उत्पन्न होता है, उसे वह साफ करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हर प्रांत में अपनी-अपनी भाषा है, सब भाषा जरूरी है।”
ओम नारायण प्रसाद ने कहा, बंगाल में बांग्ला भाषा है, महाराष्ट्र में मराठी भाषा है, तमिलनाडु में तमिल भाषा है। हर राज्य की अपनी अलग-अलग भाषा है। उस भाषा को कंपलसरी करना है, राज्य भाषा जितना हो वो कंपलसरी रहेगा, लिखना-पढ़ना-बोलना उस भाषा में हो। उन्होंने कहा, “जैसे राष्ट्रीय मिठाई जलेबी है, राष्ट्रीय पशु बाघ है, राष्ट्रीय पक्षी मोर है, वैसे ही राष्ट्रीय भाषा भी कुछ होना चाहिए। इसलिए हम चाहते हैं कि हिंदी भाषा राष्ट्रीय भाषा हो।समन्वय की बात समझाते हुए उन्होंने कहा, “मान लीजिए यहां जो बांग्ला भाषी रहते हैं उनकी मातृभाषा बांग्ला है और जो हिंदी भाषी हैं उनकी मातृभाषा हिंदी है। तो हिंदी भाषी के लिए मौसी या मासी हुई बांग्ला भाषा और बांग्ला भाषी के लिए मौसी हुई हिंदी। इस तरह पूरे भारत में जितने भी राज्य हैं, सब राज्य की भाषा को मौसी और माँ का दर्जा देते हुए हम आगे बढ़ना चाहते हैं और हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में देखना चाहते हैं।














