एक बेटी और विधवा पत्नी ने सुनाया रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक भाई की कहानी
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आसनसोल :जमीन जायदाद की वजह से अक्सर रिश्तों में खटास आ जाती है ऐसा ही कुछ हुआ आसनसोल के बेल डंगाल इलाके में रहने वाले पाठक परिवार के साथ इस परिवार के मुखिया अवध बिहारी पाठक दिल के मरीज थे और आसनसोल के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था अस्पताल के डॉक्टरों ने उन्हें साफ हिदायत दी थी कि वह किसी भी तरह का दबाव या तनाव की स्थिति में ना रहें इस बात का पता अवध बिहारी पाठक के छोटे भाई बृज बिहारी पाठक को था लेकिन आरोप है कि स्थिति ऐसी बनी की बृज बिहारी पाठक ने अवध बिहारी पाठक की इस शारीरिक स्थिति का फायदा उठाते हुए ऐसा माहौल बनाया की अवध बिहारी पाठक को तड़प तड़प कर बृज बिहारी पाठक की दहलीज पर जान गंवानी पड़ी। घटना के बारे में स्वर्गीय अवध बिहारी पाठक की पत्नी सुशीला देवी और बेटी लवली पाठक ने बताया कि अवध बिहारी पाठक अपने दिल का इलाज करा रहे थे लेकिन आर्थिक स्थिति की वजह से आगे इलाज जारी रखना संभव नहीं हो रहा था इसलिए उन्होंने सोचा कि बिहार के बक्सर जिले के भरखर गांव में उनकी जो पुश्तैनी जमीन है उसे बेचकर कुछ पैसे जुटा कर अपना इलाज करवाएंगे इसके लिए उन्होंने अपने छोटे भाई बृज बिहारी पाठक से संपर्क किया बृज बिहारी पाठक रानीगंज में एक निजी कंपनी में काम करते हैं और यह काम भी अवध बिहारी पाठक की वजह से ही बृज बिहारी पाठक को मिला था अवध बिहारी पाठक ने अपने छोटे भाई बृज बिहारी पाठक को बताया कि वह अपना और बेहतर इलाज करवाना चाहते हैं इसके लिए वह अपने बिहार की पुश्तैनी जमीन को बेचना चाहते हैं ब्रिज बिहारी पाठक जिन्हें अपने बड़े भाई अवध बिहारी पाठक की बीमारी का बहुत अच्छे तरीके से पता था वह राजी हो गए और दोनों भाइयों ने मिलकर तय किया कि बिहार जाकर जमीन का बंटवारा करके अवध बिहारी पाठक अपनी जमीन बेच देंगे अपने भाई के इस आश्वासन के बाद अवध बिहारी पाठक को काफी सुकून मिला और दोनों भाइयों के तय तारीख पर अवध बिहारी पाठक आसनसोल से अपने पूरे परिवार को साथ लेकर बिहार में अपने पुश्तैनी गांव चले गए लेकिन बृज बिहारी पाठक तय तारीख पर नहीं आए और 9 दिन बाद वह अपने पुश्तैनी गांव पहुंचे बृज बिहारी पाठक ने अवध बिहारी पाठक के पूरे परिवार के सामने एक बार फिर आश्वासन दिया कि वह पुश्तैनी जायदाद का बंटवारा करने को राजी है और अवध बिहारी पाठक अपने हिस्से की जमीन बेचकर अपना इलाज करवा सकते हैं यहां तक के ब्रिज बिहारी पाठक ने जमीन के लिए ग्राहक भी सुनिश्चित कर दिया उस व्यक्ति ने अवध बिहारी पाठक को 21000 का टोकन मनी भी दे दिया इससे अवध बिहारी पाठक को यह महसूस हुआ कि अब उनका अच्छे से इलाज हो सकता है लेकिन जब अवध बिहारी पाठक का बाकी परिवार आसनसोल वापस आ गया और वह सिर्फ अपनी पत्नी के साथ अपने पुश्तैनी गांव में रह गए तब बृज बिहारी पाठक ने अपना असली रंग दिखाया और अपने किए हुए वादे से मुकर गए जिसे सुनकर अवध बिहारी पाठक को बहुत बड़ा धक्का लगा और वह बृज बिहारी पाठक से सवाल करने लगे इस बारे में घटनास्थल पर मौजूद अवध बिहारी पाठक की पत्नी सुशीला देवी ने बताया कि इसे लेकर दोनों भाइयों में जोरदार बहस हुई और अवध बिहारी पाठक यह कहने को मजबूर हुए की जिस छोटे भाई के लिए उन्होंने इतना कुछ किया उसे पढ़ाया लिखाया उसे रोजगार करने लायक बनाया रानीगंज में एक निजी कंपनी में उसे काम पर लगाया आज वही भाई कसाई बन गया है। अवध बिहारी पाठक ने बृज बिहारी पाठक को मनाने का बहुत प्रयास किया लेकिन बृज बिहारी पाठक के सर पर जैसे खून सवार था और वह चाहते थे कि अवध बिहारी पाठक की हालत बिगड़े और उन्हें कुछ हो जाए और हुआ भी वही बृज बिहारी पाठक की इस वादा खिलाफी का अवध बिहारी पाठक पर काफी असर पड़ा और वह बृज बिहारी पाठक के घर की दहलीज के सामने गिर गए लेकिन कलयुगी भाई का दिल नहीं पसीजा और उसने अपने बड़े भाई को बचाने का भी प्रयास नहीं किया आखिरकार अवध बिहारी पाठक अपने पुरखों की जमीन पर अपने छोटे भाई के घर के बंद दरवाजे के बाहर तड़प तड़प कर चल बसे और यह सब कुछ सुशीला देवी को अपनी आंखों से देखना पड़ा। इस घटना से सुशीला देवी और अवध बिहारी पाठक की बेटी लवली पाठक बेहद आतंकित हैं और उन्हें अब यह लगने लगा है की कहीं स्वर्गीय अवध बिहारी पाठक के बाद बृज बिहारी पाठक और उनके रिश्तेदार आसनसोल में उनके परिवार को नुकसान ना पहुंचाएं इसके लिए इन्होंने बंगाल और बिहार प्रशासन के विभिन्न दफ्तरों को चिट्ठी लिखी है और अपनी सुरक्षा की गुहार लगाई है इस बारे में जब हमने सूशीला देवी और लवली पाठक से बात की तो उन्होंने साफ कहां कि बृज बिहारी पाठक की वजह से ही अवध बिहारी पाठक को तड़प तड़प कर अपनी जान गंवानी पड़ी उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में बृज बिहारी पाठक या उनके कोई रिश्तेदार उनपर दबाव बनाते हैं तो उनके खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी सुशीला देवी और लवली पाठक दोनों ने कहा कि वह लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और प्रशासन से उन्होंने सुरक्षा की गुहार लगाई














