बर्नपुर में कथित धर्मांतरण विवाद पर शहर के विशिष्ट नागरिक जार्ज ओस्टा ने क्या कहा
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बर्नपुर :कल बर्नपुर में कथित तौर पर धर्मांतरण के आरोप लगने के बाद काफी विवाद खड़ा हो गया था इस मुद्दे पर आसनसोल के विशिष्ट नागरिक जॉर्ज ओस्टा ने एक बयान जारी किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि एक सच्चा ईसाई दूसरों को यीशु मसीह का अनुसरण करने के लिए सांसारिक सुख-सुविधाओं या भौतिक लाभों का प्रलोभन देकर प्रेरित नहीं करता, बल्कि अपने जीवन को विश्वास, सत्यनिष्ठा, करुणा और सेवा के मूल्यों पर आधारित बनाकर प्रेरित करता है। यीशु मसीह की शिक्षाओं का वास्तविक साक्ष्य व्यक्ति के आचरण और जीवनशैली से प्रकट होता है। उन्होंने आगे कहा कि मेरी जानकारी के अनुसार, रोमन कैथोलिक चर्च न तो बलपूर्वक धर्मांतरण का समर्थन करता है और न ही किसी प्रकार के प्रलोभन या दबाव के माध्यम से धर्म परिवर्तन को प्रोत्साहित करता है। आस्था एक अत्यंत व्यक्तिगत विषय है और इसे केवल व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा तथा अंतःकरण की स्वीकृति के आधार पर ही अपनाया जाना चाहिए। यह संभव है कि कुछ व्यक्ति या समूह अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए ईसाई मिशनरियों के नाम का दुरुपयोग करते हों तथा ऐसे कार्यों में संलग्न हों जो ईसाई धर्म और चर्च की मूल शिक्षाओं एवं सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे कृत्यों को ईसाई समुदाय या चर्च का प्रतिनिधि नहीं माना जाना चाहिए। जार्ज ओस्टा ने आगे कहा कि मैं अपनी व्यक्तिगत क्षमता में किसी भी प्रकार के बलपूर्वक धर्मांतरण अथवा लालच, प्रलोभन, दबाव या किसी अन्य अनुचित माध्यम से लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करने के प्रयासों की स्पष्ट और कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ। भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद का धर्म मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने का अधिकार प्रदान करता है। किंतु धर्म से संबंधित कोई भी निर्णय पूर्णतः स्वतंत्र, स्वैच्छिक और व्यक्तिगत विश्वास पर आधारित होना चाहिए।
धार्मिक स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक है जब उसका प्रयोग व्यक्ति की स्वतंत्र इच्छा, सूचित निर्णय और सच्ची आस्था के आधार पर किया जाए।














