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November 5, 2026

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चुनाव आयोग का दावा:एक जैसे एपिक नंबर के मामले का आखिरकार बीस साल बाद किया गया समाधान

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मतदाता परिचय पत्र या एपिक में एक ही नंबर पर एक से ज्यादा मतदाताओं के अस्तित्व को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हुआ था राष्ट्रीय चुनाव आयोग की तरफ से घोषणा की गई थी कि 3 महीने के अंदर मतदाता सूची में जो भी भ्रांतियां हैं उन्हें संशोधित किया जाएगा निर्धारित समय के अंदर ही चुनाव आयोग द्वारा यह घोषणा कर दी गई की संशोधन का काम खत्म हो चुका है एक एपिक नंबर पर अब एक से ज्यादा मतदाताओं के नाम नहीं मिलेंगे कमिश्नर का कहना है कि एक एपिक नंबर पर एक से ज्यादा मतदाताओं की संख्या बहुत कम थी औसतन हर चार बूथ पर एक व्यक्ति के संदर्भ में ही ऐसी घटना हुई थी हर बुथ पर औसतन 1000 मतदाता होते हैं पूरे देश में तकरीबन साढ़े दस लाख बुथ हैं। कमीशन द्वारा हर एक मामले की गहराई से जांच की गई एक एपिक नंबर पर एक से ज्यादा मतदाता के नाम पंजीकृत है या नहीं यह भी देखा गया कमीशन का कहना है कि एक ही एपिक नंबर पर एक से ज्यादा मतदाताओं के नाम रहने पर भी वह सभी असली मतदाता है लेकिन वह अलग-अलग विधानसभा केंद्र और बुथ के मतदाता हैं। ऐसे मतदाताओं में से हर एक मतदाता को नया एपिक नंबर यानी मतदाता परिचय पत्र दिया गया है। जब ऐसे मतदाताओं के अस्तित्व को लेकर काफी राजनीतिक विवाद हुआ था तो राष्ट्रीय चुनाव आयोग द्वारा 3 महीने के अंदर सभी भ्रांतियां को दूर करने की बात कही गई थी कमिश्नर ने बताया कि 2005 में यह समस्या शुरू हुई थी उस समय एपिक नंबर देने के मामले में अल्फा न्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल करने के लिए विकेंद्रीकरण किया गया था। जिस वजह से यह समस्या उत्पन्न हुई थी इसके अलावा कुछ टाइपोग्राफिक गलतियां हुई थी पूरी व्यवस्था को केंद्रीय रूप से नियंत्रित किया गया था लेकिन संशोधन नहीं हुआ था। कमिशन का यह भी कहना है कि हर एक मतदाता का नाम उस पोलिंग स्टेशन की मतदाता सूची में दर्ज रहता है जिस क्षेत्र का वह निवासी है। ऐसे में एक ही एपिक नंबर होने पर भी कोई मतदाता किसी अन्य बुथ पर मतदान नही कर सकता। इसलिए समान एपिक नंबर की वजह से मतदान पर प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है

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