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पर्यावरण की रक्षा का संदेश देते हुए भारत की पदयात्रा से लौटे आसनसोल के युवक का भव्य स्वागत:

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आसनसोल :आसनसोल के मोहिशिला इलाके के दक्षिण पाड़ा निवासी देबु मुखर्जी आज पूरे देश की पदयात्रा करके वापस आसनसोल लौटे देबु के पिता की मां घागर बुरी मंदिर में एक फूलों की दुकान है और वह खुद टोटो चला कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं लेकिन पर्यावरण की सुरक्षा और पेड़ लगाने का संदेश देते हुए देबू मुखर्जी 3 फरवरी को अपनी इस यात्रा पर निकले थे और आज उनका सफर समाप्त हुआ इस बारे में देबू मुखर्जी ने बताया कि सफर में कई मुश्किलें आईं लेकिन हर कदम पर उनके दोस्तों ने उनको सहयोग किया उनका साथ दिया उन्होंने कहा कि वह पैदल चलते-चलते लद्दाख तक पहुंचे थे और हर जगह उन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा तथा पेड़ लगाने का संदेश दिया उन्होंने कहा कि इस सफर में उनको कई ऐसे लोग भी मिले जिन्होंने उनकी मदद की उनको सहयोग किया उनकी हौसला अफजाई की चाहे वह मध्यप्रदेश हो या छत्तीसगढ़ या पंजाब हरियाणा हर जगह पर उनको कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति मिला जिसने उनको पूरी तरह से सहयोग किया उन्होंने कहा कि जब भी वह किसी मुसीबत में होते थे उनके दोस्त उनकी मदद करते थे जब वह वाराणसी पहुंचे तो उनके दोस्त उनसे मिलने वहां पहुंचे थे कानपुर में भी उनके दोस्तों ने उनसे मुलाकात की थी उन्होंने बताया कि उनके दोस्तों ने जब भी कोई जरूरत हुई मदद की थी दवाई पहुंचाएं जब उनका बैग फट गया तो उनके दोस्तों ने उनको बैग उपलब्ध कराया आज वापस आकर उनको बहुत अच्छा लग रहा है और अपने सफलता के लिए उन्होंने अपने दोस्तों को धन्यवाद दिया । वही उनके एक दोस्त कृष्ण दास ने कहा कि आज जब वह अपना सफर पूरा करके वापस आ रहे हैं तो उन्होंने उनको फूलों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया कहां की जब भी उनके दोस्त को कभी भी किसी चीज की जरूरत हुई उन्होंने उनको वह उपलब्ध कराने की कोशिश की ऐसा कई बार हुआ है कि वह ऐसी जगह पर थे जहां पर ऑनलाइन पैसे भेजना संभव नहीं था लेकिन बाद में उनकी मदद की गई उन्होंने कहा कि वह खुद भी मोटरसाइकिल से लद्दाख गए थे तब उन्होंने देबू को भी जाने के लिए कहा था लेकिन किन्ही कारणों से हो तब नहीं जा पाए थे और अब वह पैदल ही भारत यात्रा पर निकले और पर्यावरण बचाओ पेड़ लगाओ का संदेश दिया उन्होंने कहा कि अपने दोस्त की सफलता से वो काफी गौरवान्वित है और आज जबकि वह लौटकर आए हैं तो उनका भव्य स्वागत किया गया

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