तृणमूल श्रमिक नेता ने उठाए आसनसोल बस स्टैंड में करोड़ों के कथित घोटाले पर सवाल, भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी बोले— “कट मनी और सिंडिकेट राज पर लगेगी लगाम
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आसनसोल : बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के बाद सत्ता परिवर्तन के उपरांत अब आसनसोल बस स्टैंड में वर्षों से चल रहे कथित “डेवलपमेंट फीस” वसूली मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। तृणमूल कांग्रेस के श्रमिक संगठन आईएनटीटीयुसी नेता राजू अहलूवालिया ने आसनसोल नगर निगम के नाम पर बसों से प्रतिदिन वसूले जा रहे 10 से 20 रुपये को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजू अहलूवालिया का आरोप है कि आसनसोल बस स्टैंड में “रखरखाव और डेवलपमेंट” के नाम पर वर्षों से पैसे वसूले जाने के बावजूद उसका पूरा हिसाब नगर निगम में जमा नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि यह मामला कोई नया नहीं है, बल्कि पूर्व मेयर तापस बनर्जी के कार्यकाल में भी इसको लेकर शिकायत और कार्रवाई हो चुकी है।
इस संदर्भ में राजू अहलूवालिया ने 16 मार्च 2014 को तत्कालीन मेयर तापस बनर्जी द्वारा आसनसोल दक्षिण थाना प्रभारी को भेजे गए एक पत्र का हवाला दिया कि किस तरह उस समय भी बस स्टैंड डेवलपमेंट फीस में कथित गड़बड़ी सामने आई थी। पत्र के अनुसार, इस्माइल इलाके के निवासी अशिम मित्रा उर्फ “बच्चू” को आसनसोल बस एसोसिएशन की सिफारिश पर बसों से प्रतिदिन 5 रुपये प्रति बस के हिसाब से डेवलपमेंट फीस वसूलने की अनुमति दी गई थी।
आरोप है कि 1 अगस्त 2009 से 28 फरवरी 2014 तक कुल 26 लाख 40 हजार रुपये की वसूली हुई, लेकिन नगर निगम के खाते में मात्र 8 लाख 39 हजार 350 रुपये ही जमा किए गए। राजु आहलुवालिया ने कहा कि निगम द्वारा दावा किया गया था कि लगभग 18 लाख रुपये से अधिक की राशि जमा नहीं की गई और कई बार नोटिस देने के बावजूद रकम वापस नहीं हुई। इसके बाद पुलिस से कानूनी कार्रवाई और बकाया राशि की वसूली का अनुरोध किया गया था। राजू अहलूवालिया ने कहा कि पूरे मामले पर पारदर्शी जानकारी प्राप्त करने के लिए उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत आसनसोल नगर निगम के जन सूचना अधिकारी को आवेदन देकर कई अहम सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा है कि आखिर किस नियम और आदेश के तहत किसी निजी व्यक्ति को सरकारी बस स्टैंड से पैसा वसूलने की अनुमति दी गई।
उन्होंने RTI में पूछा है कि अब तक कुल कितनी राशि वसूली गई, निगम में कितनी जमा हुई और कितनी बकाया है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या इस वसूली के लिए निगम की आधिकारिक रसीद जारी होती थी या नहीं। आवेदन में यह भी कहा गया कि अगर सरकारी राजस्व की हानि हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
राजू अहलूवालिया ने नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहां है कि आसनसोल नगर निगम बिना पारदर्शी प्रक्रिया अपनाए अपने मन मुताबिक लोगों को टेंडर दे देता है और बाद में वही लोग कथित रूप से भ्रष्टाचार में शामिल हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति पर पहले आरोप लगे, उसके खिलाफ शिकायत हुई, कार्रवाई हुई और वह जेल भी गया, लेकिन इसके बावजूद बस स्टैंड में भ्रष्टाचार नहीं रुका। इस संदर्भ में जब हमने आसनसोल उत्तर से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक कृष्णेंदू मुखर्जी से बात की तो उन्होंने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा सरकार में किसी भी प्रकार की “कट मनी”, सिंडिकेट या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने कहा कि अगर नगर निगम के नाम पर अवैध वसूली हो रही है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
भाजपा विधायक के इस बयान और श्रमिक नेता द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद आसनसोल बस स्टैंड में कथित रूप से पैसा वसूलने वाले सिंडिकेट में हड़कंप का माहौल बताया जा रहा है। दरअसलजानकारी के अनुसार आसनसोल बस स्टैंड में लगभग 350 मिनी बसें और 250 बड़ी बसें संचालित होती हैं। यदि प्रत्येक बस से प्रतिदिन 10 रुपये लिए जाएं तो कुल वसूली 6,500 रुपये प्रतिदिन होती है। वहीं 20 रुपये प्रति बस के हिसाब से यह रकम रोजाना 13 हजार रुपये बनता है। ऐसे में महीने और साल भर में यह आंकड़ा लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
राजू अहलूवालिया ने सवाल उठाया कि यदि नगर निगम के नाम पर पैसा वसूला जा रहा है और निगम में जमा नहीं हो रहा, तो आखिर यह राशि किसके पास जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार लिखित शिकायत देने के बावजूद प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं करता, जिसके कारण कथित भ्रष्टाचार में शामिल लोगों का मनोबल बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई बस चालक डर के कारण खुलकर विरोध नहीं करते क्योंकि उन्हें डर है कि यदि वह आवाज उठाते हैं तो सिंडिकेट से जुड़े लोग उनके साथ मारपीट कर सकते हैं उन्हें नुकसान पहुंचा सकते हैं। इतना ही नहीं बस स्टैंड पर यात्री सुविधाओं पर भी राजू अहलूवालिया ने सवाल उठाया
राजू अहलूवालिया ने कहा कि यदि बस स्टैंड से वसूली गई राशि का सही उपयोग होता तो आज यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलतीं। उन्होंने कहा कि बस स्टैंड में पेयजल, साफ प्रतीक्षालय, शौचालय और यात्री सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। ऐसे में जरूरी है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो और यह पता लगाया जाए कि डेवलपमेंट के नाम पर वसूले गए पैसे आखिर कहां खर्च हुए। कहा जा सकता है कि बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद एक मंथन का दौर चल रहा है आसनसोल भी इससे अछूता नहीं है यहां पर भी व्यापक तौर पर मंथन चल रहा है और ऐसी कई बातें सामने आ रही हैं जो अब तक सबकी नजरों के सामने भले थी लेकिन कोई उनके बारे में बात नहीं करना चाह रहा था अब जबकि बंगाल में भाजपा की प्रचंड बहुमत से सरकार बन गई है तो देखना यह है की क्या भ्रष्टाचार के जो मामले सामने आ रहे हैं या जिस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं उन पर कोई सार्थक कार्रवाई होती है या नहीं














