*भारत को ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों पर करना होगा विचार – शुभोजित घांटी*
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: शुक्रवार से पूरे देश में कमर्शियल सिलेंडर के दाम लगभग 1000 रुपए बढ़ा दिए गए हैं। केंद्र सरकार का कहना है कि मिडिल ईस्ट में जो अशांति के बादल छाए हुए हैं उस वजह से उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। समझा जा रहा है कि कमर्शियल सिलेंडर के दाम इतने ज्यादा बढ़ा दिए जाने से होटल व्यवसाय पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हमने इस बारे में होटल गीतांजलि से जुड़े शुभोजित घांटी से बात की। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से होटल और रेस्टोरेंट व्यवसाय पर थोड़ा बहुत असर तो पड़ेगा ही। अभी तक उनके होटल में जो खाद्य सामग्री जितनी कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही थी सिलेंडर के दाम बढ़ने से उसकी कीमत जरूर बढ़ जाएगी लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि आखिर केंद्र सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में जो अस्थिरता चल रही है उस वजह से भारत में पेट्रोलियम प्रोडक्ट की आपूर्ति पर काफी असर पड़ा है जिस वजह से केंद्र सरकार को मजबूरी में यह फैसला लेना पड़ा है। उन्होंने कहा कि कुछ दिनों पहले तक तो सिलेंडर उपलब्ध ही नहीं थे लेकिन अब कम से कम उपलब्धता में कोई कमी नहीं है यह एक अच्छी खबर है। उन्होंने कहा कि जब भी किसी वस्तु की कीमत बढ़ती है तो उसका प्रभाव अन्य चीजों पर भी पड़ता है और कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से इस बात की पूरी आशंका है कि आने वाले समय में इसका असर पूरी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और महंगाई भी बढ़ेगी। लेकिन जिस तरह के राजनीतिक हालात मिडल ईस्ट में बन चुके हैं उन पर किसी का नियंत्रण नहीं है जिस वजह से हमें इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आज मिडल ईस्ट में जो हो रहा है वह एक वैश्विक समस्या है जिसका असर पूरे विश्व पर पड़ रहा है ऐसे में भारत इससे अछूता नहीं रह सकता लेकिन हमें विकल्पों के बारे में भी सोचना होगा। उन्होंने कहा कि तेल कंपनियों की तरफ से होटल से जुड़े व्यापारियों को पाइप्ड नेचुरल गैस या पीएनजी की तरफ रुख करने के लिए कहा गया है। शुभोजित घांटी ने कहा कि दुर्गापुर में पीएनजी का चलन काफी शुरू हो चुका है उम्मीद है कि आसनसोल में भी यह बड़े पैमाने पर शुरू हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके अलावा सोलर एनर्जी या सौर ऊर्जा का भी इस्तेमाल करना अब आवश्यक हो चुका है। शुभोजित घांटी ने बताया कि भारत पेट्रोलियम प्रोडक्ट के लिए आयात पर निर्भर करता है इसलिए अब यह बहुत जरूरी हो गया है कि हम ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों के बारे में विचार करें और उनका इस्तेमाल करें ताकि भविष्य में हम ऊर्जा के क्षेत्र में स्वनिर्भर हो सकें














