श्रीपुर तथा सात ग्राम एरिया के विलय के विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमिटी की बैठक:
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आसनसोल :हाल ही में ईसीएल द्वारा श्रीपुर और 7 ग्राम एरिया का विलय कर दिया गया है क्षेत्र में सक्रिय सभी श्रमिक संगठन पहले से ही इसका विरोध कर दिया रही थी लेकिन ईसीएल द्वारा श्रमिक संगठनों के विरोध को दरकिनार करते हुए 1 अप्रैल से विलय को कार्यान्वित कर दिया गया इसके खिलाफ ईसीएल क्षेत्र में सक्रिय विभिन्न श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच ज्वाइंट एक्शन कमेटी की तरफ से भी समय-समय पर विरोध प्रदर्शन किया जाता रहा है इसी क्रम में आज ज्वाइंट एक्शन कमेटी की एक बैठक हुई आसनसोल के एआईटीसी कार्यालय में हुई इस बैठक में विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेता उपस्थित थे इस मौके पर केके एस सी महामंत्री हरेराम सिंह एचएमएस के जनरल सेक्रेटरी एसके पांडे सहित विभिन्न श्रमिक संगठनों के नेता गण उपस्थित थे ज्वाइंट एक्शन कमेटी की तरफ से फैसला लिया गया कि कल ईसीएल को एक नोटिस दिया जाएगा जिसमें 11 सूत्री मांगे होंगी अगर ईसीएल द्वारा इन मांगों पर कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दिया गया तो 7 दिनों के बाद ज्वाइंट एक्शन कमिटी अपने अगले कदम पर विचार करेगी इस बारे में हरेराम सिंह ने कहा की शुरू से ही स्थानीय स्तर पर श्रीपुर तथा 7 ग्राम एरिया में श्रमिक संगठन ईसीएल के इस फैसले का विरोध कर रहे थे जिसमें वह लोग भी सम्मिलित से लेकिन यह बड़े अफसोस की बात है कि ईसीएल द्वारा उन लोगों के विरोध को दरकिनार करते हुए 1 अप्रैल से इस विलय को कार्यान्वित कर दिया गया उन्होंने साफ कहा कि वह नहीं चाहते कि आंदोलन आदि करके इस ईसीएल का माहौल बिगड़ा जाए लेकिन अगर ईसीएल अपने फैसले पर अड़ा रहा तो श्रमिक संगठनों के पास आंदोलन को और जोरदार करने के अलावा और कोई चारा नहीं रहेगा वहीं जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि विलय के इस फैसले के खिलाफ तो पहले से ही आंदोलन किया जा रहा था फिर भी ईसीएल द्वारा यह कदम उठाया गया तो क्या उनको लगता है कि आने वाले समय में ज्वाइंट एक्शन कमेटी के बैनर तले आंदोलन करने से कोई फायदा होगा तो उन्होंने कहां कि उनका पूरा भरोसा है कि ज्वाइंट एक्शन कमेटी के संयुक्त आंदोलन के सामने ईसीएल को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना ही पड़ेगा वहीं एचएमएस के महामंत्री एसके पांडे ने भी यह ईसीएल के इस विलय के फैसले की कड़ी मजम्मत की । उन्होंने बताया कि ईसीएल के मुख्यालय सांकतोड़िया के अधिकारियों ने उनको अंधेरे में रखा जब भी वहां के अधिकारियों से श्रमिक संगठन के नेता यह पूछते तो अनाधिकृत रूप से वह ऐसा ही कहते कि नहीं विलय की कोई बात नहीं है लेकिन अचानक 1 अप्रैल से इसे लागू कर दिया गया उन्होंने कहा कि यह फैसला कोल इंडिया का नहीं है यह ईसीएल के बिजनेस डिपार्टमेंट द्वारा प्रस्तावित किया गया था उनका कहना था कि ऐसा करने से ईसीएल को सालाना 129 करोड का लाभ होगा लेकिन श्रमिक संगठन इसके खिलाफ थे और श्रमिक संगठनों ने कई बार ईसीएल प्रबंधन को अपनी असहमति से अवगत भी कराया था लेकिन ईसीएल ने श्रमिक संगठनों की बातों पर गौर नहीं किया और 1 अप्रैल से इसे लागू कर दिया उन्होंने साफ कहा कि कल ईसीएल को एक नोटिस दिया जाएगा अगर ईसीएल द्वारा 7 दिनों के अंदर उस पर पर सकारात्मक पहल नहीं की गई तो आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा












