आसनसोल नगर निगम की तरफ से किया गया डॉ बिधान चंद्र राय को याद:
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बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ बिधान चंद्र राय की जयंती और पुण्यतिथि 1 जुलाई को ही पड़ती है डॉ बिधान चंद्र राय को याद करते हुए आज आसनसोल नगर निगम की तरफ से कल्याणपुर हाउसिंग में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां मेयर विधान उपाध्याय चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी घोषित उप मेयर अभिजीत घटक वसीम उल हक एमआईसी गुरदास चटर्जी पार्षद श्रावणी मंडल अनिमेष दास सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद थे इस मौके पर अपने वक्तव्य में मेयर बिधान उपाध्याय ने डॉ बिधान चंद्र राय को याद करते हुए कहा कि उनको नए बंगाल का सृजनकर्ता कहा जाता है। उन्होंने जिस तरह से बंगाल को एक नई शक्ल प्रदान की थी वह काबिले तारीफ है मेयर ने कहा कि 2011 में जब से राज्य में ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी की सरकार बनी है वह चाहते हैं की महान विभूतियों को आज की पीढ़ी ना भूले यही वजह है कि हर महान विभूति की जयंती और पुण्यतिथि के अवसर पर नगर निगम की तरफ से कार्यक्रम का आयोजन होता है उन्होंने बताया कि अब स्कूल स्तर पर भी इस तरह के आयोजनों के बारे में सोचा जा रहा है ताकि स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डॉ बिधान चंद्र राय जैसी महान विभूतियों के बारे में जानकारी हो वही अपने वक्तव्य में अभिजीत घटक ने भी डॉ बिधान चंद्र राय को याद किया । उन्होंने कहा कि डॉ बिधान चंद्र राय एक विरल प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे बतौर डॉक्टर उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह मरीज की आंख देखकर या सिर्फ उसका नब्ज टटोलकर बता दिया करते थे कि उसे क्या बीमारी है जबकि आज दर्जनों टेस्ट कराए जाते हैं उसके बाद ही मरीज की बीमारी का पता चलता है उन्होंने कहा की एक राजनेता के रूप में भी डॉ बिधान चंद्र राय ने अपनी अमिट छाप छोड़ी है और उनकी परियोजनाओं को ही उनके बाद के मुख्यमंत्रियों द्वारा अनुसरण किया गया उन्होंने कहा कि डॉ बिधान चंद्र राय एक युगपुरुष थे जिन्होंने बंगाल का कायाकल्प किया वही चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि डॉ बिधान चंद्र राय के सानिध्य में जो भी आए उन्होंने बहुत कुछ उनसे सीखा अमरनाथ चटर्जी ने कहा विधान चंद्र राय एक दूरदृष्टि संपन्न इंसान थे। जब भारत का बंटवारा हुआ और लाखों की संख्या में शरणार्थी भारत में आने लगे तब उनके रहने के लिए डॉ बिधान चंद्र राय ने मोहिशिला कॉलोनी कल्याणपुर हाउसिंग कल्याणी साल्ट लेक सहित तमाम इलाकों के बारे में सोचा जिससे तत्कालीन पाकिस्तान और वर्तमान बांग्लादेश से आए बंगाली समुदाय के लोगों को एक साथ एक जगह पर रखा जा सके उन्होंने कहा कि अगर वामपंथियों ने अड़ंगा नहीं डाला होता तो उड़ीसा के दंडकारण्य में भी एक और बंगाल बन सकता था लेकिन वामपंथियों की वजह से शरणार्थियों को वहां भेजा नहीं जा सका ।













