आसनसोल लोकसभा उपचुनाव बनी प्रतिष्ठा की लड़ाई:
1 min readआसनसोल लोकसभा उपचुनाव के लिए 12 तारीख़ को मतदान होगा। उससे पहले सभी सियासी दलों की तरफ़ से मतदाताओं को रिझाने की पुरी कोशिश की जा रही है । दरअसल यह सिर्फ़ एक सीट के लिए उप चुनाव नहीं है। यह कहीं न कहीं टीएमसी और भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की बात हो गई है। जब टीएमसी की तरफ़ से प्रत्याशी के रुप में शत्रुघ्न सिन्हा का नम घोषित किया गया था तब बाबुल सुप्रियो ने एक तरह से भाजपा को चुनौती देते हुए कहा था कि भाजपा इस सीट को जीतकर दिखाए। इसके जवाब में भाजपा प्रत्याशी अग्नि मित्रा पाल ने कहा था कि बाबुल सुप्रियो आसनसोल से दो बार भाजपा की टिकट पर जीते हैं इसमें उनका कोई श्रेय नही था। वह नरेंद्र मोदी के कारण जीते थे। यहीं इस सीट की महत्ता है। अगर इस बार भी भाजपा आसनसोल को जीतने में कामयाब रहती है तो भाजपा को दावा करने का मौका मिल जाएगा कि बाबुल सुप्रियो यहां से कोई फैक्टर नहीं थे पीछले दो बार की जीत नरेंद्र मोदी की जीत थी। वहीं आगर टीएमसी प्रत्याशी शत्रुघ्न सिन्हा जीतते हैं तो टीएमसी ये दावा करेगी की आसनसोल की जनता ने मोदी की नीतियों को ठुकरा दिया और यह 2024 आम चुनाव से पहले एक झांकी है ।
इस बार के चुनावी मैदान में वाम फ्रंट और कांग्रेस भी हैं। दोनो ही दल के प्रत्याशी ज़ोरदार प्रचार भी कर रहे हैं लेकीन राजनीति के जानकारों की मानें तो इस उप चुनाव में असली टक्कर भाजपा और टीएमसी के बीच है।












