आसनसोल में रचा गया इतिहास 70 कठ्ठे की पुश्तैनी संपत्ति को किया गुरुद्वारे के नाम
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:आसनसोल की धरती पर आज स्वर्गीय आर एस चौधरी के बेटे गुरविंदर सिंह चौधरी ने एक ऐसी इबारत लिखी जिसकी मिसाल ना तो पहले कभी आसनसोल में थी और भविष्य में भी इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति होना बहुत मुश्किल है गुरविंदर सिंह ने आसनसोल के पुलिस लाइन में उनकी पुश्तैनी लगभग 70 कठ्ठे की पूरी की पूरी संपत्ति को आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे के नाम दान कर दिया इस जमीन पर चौधरी परिवार पिछले तकरीबन 100 साल से ज्यादा समय से रहता आया है लेकिन आज गुरविंदर सिंह चौधरी ने यह सारी की सारी संपत्ति आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे को दान कर दी। इसे लेकर आज आसनसोल के पुलिस लाइन में चौधरी निवास में एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें आसनसोल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष अमरजीत सिंह भरारा गुरविंदर सिंह के अलावा आसनसोल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के तमाम अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे यहां अमरजीत सिंह भरारा ने इस बात की जानकारी दी की गुरविंदर सिंह ने अपनी पुश्तैनी संपत्ति जो कि लगभग 70 कट्ठा में फैली हुई है उसे आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे के नाम दान करने का फैसला लिया है अमरजीत सिंह भरारा ने इसके लिए गुरविंदर सिंह को धन्यवाद दिया उन्होंने कहा कि आज की तारीख में जब छोटी से छोटी संपत्ति के लिए भी हम विवाद देखते हैं ऐसे समय में गुरविंदर सिंह ने इतनी बड़ी संपत्ति आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे के नाम दान करने का जो फैसला लिया है वह अपने आप में अतुलनीय फैसला है उन्होंने कहा कि गुरविंदर सिंह का यह फैसला आसनसोल के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखा रहेगा।

हालांकि उन्होंने गुरविंदर सिंह के इस फैसले पर आश्चर्य नहीं जताया क्योंकि गुरविंदर सिंह जिस व्यक्ति के बेटे हैं वह आरएस चौधरी भी एक महान इंसान थे और उन्होंने भी हमेशा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर का हिस्सा लिया अमरजीत सिंह भरारा ने कहा कि गुरविंदर सिंह एक ऐसे परिवार के वारिस हैं जो आसनसोल में 100 साल से भी ज्यादा समय से रह रहा है और उन्होंने हमेशा सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है उनके यह कार्य सिर्फ सिख समाज के लिए नहीं बल्कि सभी वर्गों के लोगों के लिए होते हैं और आज गुरविंदर सिंह ने अपने परिवार की इस विरासत को आगे बढ़ाया है और उन्होंने इस पुश्तैनी संपत्ति को आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे के नाम करने का फैसला लिया है उन्होंने इस संपत्ति की कीमत के बारे में तो कुछ नहीं बताया लेकिन उन्होंने कहा कि इस पूरी संपत्ति को रजिस्ट्री करने के लिए जो स्टैंप ड्यूटी लगती है वह भी कई लाखों में लगी है और वह भी पूरी तरह से गुरविंदर सिंह ने ही अदा किया है वहीं गुरविंदर सिंह ने कहा कि वह शुरू से ही अमृतसर के स्वर्ण मंदिर दरबार साहिब से जुड़े हुए हैं और हर साल कई बार वह स्वर्ण मंदिर जाते हैं तकरीबन ढाई साल पहले भी वह एक बार स्वर्ण मंदिर गए थे और वहां बैठकर अचानक उनके मन में यह ख्याल आया वह जब वापस आए तो उन्होंने अमरजीत सिंह भरारा से बात की और इसके बाद अपने परिवार से भी बात की गुरविंदर सिंह ने कहा कि उनके परिवार ने उनके इस प्रस्ताव में हामी भरने में 1 मिनट भी नहीं लगाया और कहा की उनका यह प्रस्ताव बहुत सुंदर है और वह अपने इस फैसले को जरूर अमली जामा पहनाए अपने परिवार का समर्थन पाकर उनके मन में और उत्साह आया और आज उन्होंने आधिकारिक तौर पर इसे आसनसोल गुरु नानक गुरुद्वारे के नाम कर दिया उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन का सर्वश्रेष्ठ फैसला है और आज वह बहुत जज्बाती महसूस कर रहे हैं इस मौके पर गुरविंदर सिंह ने अमरजीत सिंह भरारा के हाथों रजिस्ट्री के कागजात और संपत्ति की चाबी सौंप दी उससे पहले एक धार्मिक अनुष्ठान भी हुआ












