टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने भारत में हो रहे घुसपैठ पर दिया बड़ा बयान
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:भारतीय जनता पार्टी द्वारा लगातार बंगाल सरकार पर घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया जाता रहा है भाजपा का कहना है कि बंगाल सरकार के राज में बांग्लादेश से आए रोहिंग्या आसानी से इस राज्य में घुस रहे हैं और यहां से पूरे देश में फैल रहे हैं आज इस बारे में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी से जब पत्रकारों ने सवाल किया तो उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अगर यह बात सच है कि भारत की सीमा के अंदर घुसपैठिये घुस रहे हैं तो प्राथमिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी किसकी है जाहिर सी बात है घुसपैठिए सीमा पार करके भारत की सरहद में प्रवेश कर रहे हैं ऐसे में भारतीय सीमा की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिस बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स की है वह देश के गृह मंत्रालय के अधीन आता है देश के वर्तमान गृहमंत्री का नाम अमित शाह है तो अगर भाजपा का कहना सही है कि घुसपैठिए बंगाल के रास्ते देश में घुस रहे हैं तो सबसे पहले अमित शाह को इस्तीफा देना चाहिए बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स के सर्वोच्च प्रभारी को इस्तीफा देना चाहिए आईबी के अधिकारियों से यह सवाल पूछे जाने चाहिए कि इतनी चुस्त सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद घुसपैठिए सीमा पार से भारत की सरहद में घुस कैसे रहे हैं। अभिषेक बनर्जी ने कहा कि अगर कुछ देर के लिए बंगाल के विषय को हम अलग रखें तो गृह मंत्रालय को इस बात का भी जवाब देना होगा की अप्रैल के महीने में पहलगाम में आतंकवादी पाकिस्तान से कश्मीर में कैसे आ गए इतने बड़े हत्याकांड को अंजाम दिया और फिर कहीं पर गायब हो गए आखिर पहलगाम पाकिस्तान से सटे भारतीय सीमा में नहीं है पहलगाम पाकिस्तान की सीमा से तकरीबन 100 किलोमीटर अंदर है ऐसे में केंद्र सरकार को इस बात का भी जवाब देना होगा कि आतंकवादी 100 किलोमीटर सीमा पार करके कश्मीर में आते हैं एक आतंकवादी घटना को अंजाम देते हैं उसके बाद वह गायब हो जाते हैं आखिर वह आतंकवादी है कहां क्या उन्हें जमीन निकल गई या आसमान खा गया। आज की तारीख में कश्मीर को पूरी तरह से राज्य का दर्जा लौटाया नहीं गया है ऐसे में कश्मीर की पुलिस भी केंद्र सरकार के अधीन आती है जब राज्य पुलिस बीएसएफ सहित तमाम सुरक्षा एजेंसीज केंद्र सरकार के अधीन है उसके बावजूद अंतर्राष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर अंदर पहलगाम में आतंकवादी आते हैं 26 मासूम लोगों की हत्या करते हैं और बिना किसी रूकावट के चले जाते हैं तो यह सवाल उठना लाज़मी है कि आखिर यह किसकी नाकामयाबी है












