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November 5, 2026

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नगर निगम के सेवानिवृत इंजीनियर हुए साइबर ठगी का शिकार लगा 1.65 करोड रुपए का चुना

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आसनसोल :साइबर अपराधों की श्रेणी में एक नया अपराध का तरीका जुड़ गया है वह है डिजिटल अरेस्ट का तरीका इसके जरिए अचानक किसी के पास फोन आता है और कहा जाता है कि फोन करने वाला व्यक्ति किसी केंद्रीय जांच एजेंसी या अन्य संस्था का अधिकारी है और फोन करने वाले व्यक्ति को विभिन्न तरीकों से डराया धमकाया जाता है और उनसे पैसे वसूले जाते हैं इसी कड़ी में आसनसोल नगर निगम के पूर्व इंजीनियर सुकुमार दे को साइबर अपराधियों ने 32 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और उनसे 1.65 करोड रुपए वसूल लिए। घटना के बारे में पता चला है कि 9 मई को सुकुमार दे के पास एक फोन आता है फोन करने वाला खुद को बीएसएनल का अधिकारी बताता है और कहता है कि सुकुमार दे के आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मुंबई में सिम लिया गया है जिसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों अवैध लेनदेन और पोर्न फिल्म बनाने के लिए किया गया है। अपनी बातों को और पुख्ता तरीके से साबित करने के लिए साइबर अपराधियों ने सुकुमार दे को सुप्रीम कोर्ट का फर्जी लेटर हेड और बैंक स्टेटमेंट भेज दिया और दावा किया कि उनके नाम पर 20 करोड रुपए का बैंक अकाउंट है। इन सब बातों से सुकुमार दे इतना डर गए कि उन्होंने अपने बैंक की सारी राशि और गहने गिरवी रखकर अपराधियों को 1.65 करोड रुपए दे दिए। सुकुमार दे को व्हाट्सएप के जरिए 32 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया उन्हें हर 2 घंटे में अपना लोकेशन बताने के लिए मजबूर किया गया। लेकिन जब अपराधियों ने आरबीआई के पूर्व गवर्नर सी रंगराजन के फर्जी हस्ताक्षर वाला आदेश भेजा तब जाकर सुकुमार दे को ठगी का पता चला और उन्होंने 11 जून को आसनसोल साइबर थाने में शिकायत दर्ज की। इस मामले की जांच अब राज्य साइबर क्राईम विभाग कर रही है।

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