बंद पड़े हिंदुस्तान केबल्स कारखाने के बार-बार निरीक्षण से स्थानीय लोगों में जग रही है आस
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बाराबनी :केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय की तत्परता से रूप नारायणपुर के हिंदुस्तान केबल्स के बंद पड़े कारखाने के 947 एकड़ जमीन पर फिर से कारखाना या अन्य विकास कार्य होने की संभावना जगी है लगातार उच्च अधिकारी यहां पर निरीक्षण के लिए आ रहे हैं पिछले हफ्ते सीआईएसफ डिप्टी कमांडेंट अशोक झा के निरीक्षण के बाद आज बर्नपुर के डीआईजी प्रबोध चंद्र खुद आए और जमीन और मूलभूत ढांचे का निरीक्षण किया। सीआईएसफ द्वारा इस जमीन के एक हिस्से पर बटालियन केंद्र स्थापित करने की परियोजना है यहां तक की महिला वाहिनी के लिए भी यहां पर अलग से इंतजाम बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है आज के निरीक्षण के दौरान डीआईजी प्रबोध चंद्र ने हिंदुस्तान केबल्स के अधिकारी आर एन ओझा के साथ तकरीबन एक घंटा अलग से बैठक की। इसमें जमीन का परिमाण क्वार्टर भवन खेल का मैदान और अन्य विषयों पर विस्तृत आलोचना की गई अवैध अतिक्रमण के मुद्दे पर भी बातचीत की गई। शाम 4:00 बजे से 5:00 बजे तक प्रशासनिक भवन में सीआईएसएफ की टीम मौजूद नहीं अधिकारियों ने पत्रकारों के सवालों का जवाब तो नहीं दिया लेकिन अधिकारियों के लगातार बार-बार आने से स्थानीय लोगों को लगता है कि उन्हें यह जमीन पसंद आई है ऐसा लग रहा है कि अगर उन्हें जमीन पसंद आई है तो यहां पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराया जा सकता है सीआईएसएफ के अलावा सीआरपीएफ या अन्य निजी औद्योगिक संस्थानों के मन में भी जमीन को लेकर आग्रह रहने के बाद सही जा रही है हिंदुस्तान केबल्स पुनर्वास समिति के अध्यक्ष सुभाष महाजन ने निरीक्षण के समय मांग उठाई है उन्होंने कहा की नई परियोजना में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को नौकरी देनी होगी बंद कारखाने के कर्मचारी के बकाया धनराशि मिटाना होगा और पुराने क्वार्टर्स पूर्व कर्मचारी और उनके परिवार या जो लेने के लिए इच्छुक है उन्हें लिज पर देने की व्यवस्था करनी होगी।












