पूर्व रेलवे के 10 ट्रेन की टॉयलेट में लगेगा इंटरनेट थिंग्स लोट सेंसर बोर्ड टॉयलेट की सफाई की देगी जानकारी:
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आसनसोल: भारतीय रेलवे ने ट्रेन के गंदे और अस्वस्थ शौचालय की समस्या को दूर करने के लिए एक नई तकनीकी का सहारा लेने का फैसला लिया है। भारतीय रेलवे में यात्रा करने के दौरान ज्यादातर यात्री टॉयलेट की गंदगी और बदबू की समस्या को लेकर काफी दिनों से जूझ रहे थे। इसी को देखते हुए अब भारतीय रेलवे ने ट्रेन के टॉयलेट को साफ सुथरा बनाने के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स लोट सिस्टम टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रहे हैं ट्रेन की टॉयलेट की सफाई और बदबू की समस्या से निजात मिलेगी। इसके तहत पूर्व रेलवे के चार मंडल में 10 ट्रेनों पर इस तकनीक को लगाने की योजना बनी है। सियालदह में तीन ट्रेन हावड़ा में तीन ट्रेन आसनसोल में दो ट्रेन जसीडीह तंबाराम और आसनसोल मुंबई मेल ट्रेन में लगाने की प्रतिक्रिया चल रही है और मालदा में दो ट्रेनों में यह तकनीक लगाई जाएगी। इन सभी ट्रेनों के शौचालय में सेंसर बोर्ड लगाया जाएगा जो बोर्ड के वाई-फाई से कनेक्ट होगा इससे ऑनलाइन यह जानकारी मिलेगी की इन सब ट्रेनों की साफ सफाई कैसी हो रही है और क्या स्थिति है कहां-कहां कितनी बार ट्रेन की साफ सफाई हुई है और कैसे साफ सफाई की जा रही है। रेल बोर्ड अब इसकी निगरानी गंभीर रूप से करेगी और मंडल और हेड क्वार्टर यह सभी निगरानी में रहेगी इससे रेल यात्रियों को काफी फायदा होगा। यात्रा के दौरान टॉयलेट की गंदगी की समस्या से यात्रीयों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था इसी को देखते हुए रेलवे एक बहुत उच्च टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने जा रहा है साफ सफाई के साथ-साथ टॉयलेट से बदबू आती है उसपर भी रोकथाम करने के लिए अब यह कदम रेलवे की ओर से उठाई गई है किसी प्रकार की समस्या अगर टॉयलेट में देखी जाएगी तो जिस जगह से ट्रेन पास होगा किस जोन में है कौन सा मॉडल है तुरंत उस पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया जाएगा टॉयलेट की साफ सफाई करने के लिए रेलवे ने अपने स्तर से प्राइवेट टेंडर कर दिया गया है उसके बावजूद भी संपूर्ण रूप से टॉयलेट की साफ सफाई नहीं हो रही थी। इस समस्या को दूर करने के लिए रेलवे बोर्ड ने बदबू पता लगाने वाली एक नई तकनीकी आजमाने की सिफारिश की है यह टेक्नोलॉजी इंटरनेट ऑफ थिंग्स लौट पर आधारित होगी। इस पर निगरानी करने वाली मुंबई की एक कंपनी भी विलिसो टेक्नोलॉजी को चुना गया है रिपोर्ट के मुताबिक यह जानने के लिए की यह नई तकनीक कितनी कारगर है और ट्रेनों में सफाई की व्यवस्था कैसी चल रही है इसे कुछ लिंक होपमान बस और इंटर ग्रिल कोच फैक्ट्री डिब्बे में लगाया जाएगा












