किसान आंदोलन के नाम पर हो रहा किसानों के साथ खिलवाड़ – सुरेन जालान
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26 नवम्बर 2021 को दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के एक साल पुरे हो जाएंगे । उससे एकदिन पहले आसनसोल के विशिष्ट उद्योगपति सुरेन जालान ने इतिहास के पन्नों से कुछ किसान आंदोलनों और उनके अंजाम पर एक नजर फेरी । 12 जनवरी 1998 कांग्रेस राज में किसानों की अपनी खराब स्थिति को लेकर यह किसान आंदोलन शुरू किया गया था।उस आंदोलन मे 300 गोलियां चलाकर 27 किसानों को मौत के घाट उतार दिया गया था । हकीकत में सही मायने में यह हमारे दुखी किसानों का आंदोलन था। 27 किसानों के मरने के बाद वह आंदोलन उसी दिन समाप्त हो गया। क्योंकि उस समय उनके साथ किसान आंदोलन के नाम पर कोई भी नहीं था।27 किसानों के परिवार को आज तक ना कोई मुआवजा मिला ना ही उन्हें शहीद का दर्जा दिया गया।इसलिए कि वह हमारे सच्चे किसान भाई थे।मैं उनके बलिदान को नमन करता हूं एवं उनके परिवार को भी नमन करता हूं। सुरेन जालान ने कहा कि यदि 27 किसान जो 1998 में गोलियों द्वारा शहीद हुए थे उनका कोई भी परिवार मेरा संदेश पाकर अगर मेरे पास आते है,तो मैं अपने माध्यम से गीता देवी जालान फाउंडेशन के द्वारा उनकी पूरी सहायता करूंगा।आज देश के प्रधानमंत्री किसानों की समस्या को नही समझा पाये एवं समझे तो कैसै समझे।यह किसान आंदोलन नहीं है।देश को खंडित करने का उद्देश्य है।फिर भी देश को खंडित होने से करने बचाने लिए किसान आंदोलन के नाम पर कुछ छोटे मझोले किसान इस आंदोलन में बलि का बकरा ना बन जाए ।हमारे प्रधानमंत्री ने देशहित के लिए तीनों बिलों की वापसी माफी मांग कर की है।फिर भी देश को तोड़ने वाले किसान आंदोलन के नाम पर घर वापस न जाकर संसद भवन में 29 नवंबर को ट्रैक्टर द्वारा रैली करने की योजना बना रहे हैं एंव मानसिक रूप से देश के विकास में अवरोध पैदा कर रहे हैं। वोट बैंक की राजनीति छोडकर देश हितके लिए इसे समाप्त करना ही होगा।












