आसनसोल के प्रख्यात समाज सेवी कृष्णा प्रसाद ने जगाई एक परिवार में आस
1 min read
कृष्णा प्रसाद
आसनसोल टाइम्स : कभी कभी जिंदगी इतनी दुशवार हो जाती है कि भगवान के न्याय पर संदेह होने लगता है । लेकिन जिस भगवान ने किसी इंसान की जिंदगी में दुखों का अंबार लगाया है उसी भगवान ने उन दुखों को कम करने के लिए अन्य किसी को तारणहार के रुप में पहले ही धरती पर भेज दिया है बस जरुरत है तो उस तारणहार के मिलने की । कल्ला सेंट्रल हास्पीटल के दो नंबर पत्थर खदान धोबी पाड़ा निवासी संतोंष महतो और उनकी पत्नी सोनी देवी की जिंदगी में आसनसोल के प्रख्यात समाज सेवी कृष्णा प्रसाद उसी तारणहार की भुमिका में सामने आएं हैं । दरअसल संतोष और सोनी के दस वर्षीय पुत्र करण जन्म से दिव्यांग हैं । वह ना तो बोल सकतें हैं और ना ही चल फिर सकतें हैं । चिकित्सकों का कहना है कि करण को नर्व यानी स्नायु की बीमारी है । जैसा कि हम सब जानते हैं कि स्नायु की बीमारी का इलाज काफी खर्चीला होता है । संतोष के लिए अपने बेटे का इतना महंगा इलाज करवाना असंभव ही था । इन्होंने इसे अपनी नियति मान ली थी कि उनकी आंखों का तारा ताउम्र ऐसे ही रहेगा ।

उनको इस बात की चिंता सताने लगी थी कि उनके बाद उनके बेटे का क्या होगा? इनका कहना है कि हर जगह पे गुहार लगाने के बाद भी इनको कहीं से मदद नहीं मिली । आखिरकार आसनसोल के प्रख्यात समाज सेवी कृष्णा प्रसाद को करण की हालत का पता चला । उन्होंने फौरन बच्चे के इलाज का बीड़ा उठाने का फैसला लिया । सोमवार को केपी खदान के चासी पट्टी में कृष्णा प्रसाद द्वारा ही निर्मित एक सड़क के उद्घाटन के दौरान कृष्णा प्रसाद ने घोषणा की कि वह इस बच्चे को इलाज के लिए बैंगलुरु भेजेंगे । उन्होंने कहा कि आने वाले दो तीन दिनों के अंदर करण के माता पिता से करण के इलाज को लेकर सभी प्रकार की जानकारी ले ली जाएगी । इसके उपरांत करण को वह बैंगलुरु भेजने का प्रबंध करेंगे ताकि बच्चे का इलाज हो सके । कृष्णा प्रसाद ने बताया कि उनकी तरफ से बच्चे को एक स्वाभाविक जीवन देने के लिए कोशिशें में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी । कृष्णा प्रसाद ने आशा व्यक्त की कि बैंगलुरु में इलाज के बाद करण अन्य बच्चों की तरह एक स्वाभाविक जीवन जी पाएगा और आज जो अपने माता पिता के सहारे के बिना एक कदम नहीं चल सकता भविष्य में यही करण उनके बुढ़ापे का आसरा बनेगा ।













