दिसंबर का आखरी सप्ताह सिख धर्म के अनुयायियों के लिए है बेहद खास:
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*रानीगंज* :दिसंबर महीने का अंतिम सप्ताह बलिदानी सप्ताह के तौर पर मनाया जाता है। यह उन चार साहिबजादे की याद में समर्पित है जिन्होंने सिख और हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी दी थी उक्त बातें दुर्गापुर के बेनाचटी जगत सुधार गुरुद्वारा में आयोजित गुरमत कार्यक्रम के दौरान सिख धर्म की प्राचारिका जसप्रीत कौर खालसा ने कही। इस अवसर पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों को श्री गुरु गोविंद सिंह जी साहिब एवं चार साहिबजादे की महान कुर्बानी एवं इतिहास से अवगत कराया गया । जसप्रीत कौर ने कहा कि यह सप्ताह सिखों के दसवें गुरु गुरुगोविंद सिंह साहिब के पुत्रों साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह को समर्पित है जिनके लिए चार साहिबजादे शब्द का प्रयोग सामूहिक रूप से संबोधित करने हेतु किया जाता है। कि सिख इतिहास में चार साहिब जादे की शहादत को बेहद अहम दर्जा दिया जाता है श्री गुरु गोबिंद सिंह साहिब जी के दो बड़े बेटे बाबा अजीत सिंह और बाबा जुझार सिंह चमकौर की दूसरी लड़ाई में शहीद हुए जबकि उनके छोटे बेटे बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह को सरहिंद के मुगल गवर्नर के निर्देश पर जिंदा ही दीवार में चुनवा दिया गया था यह घटनाएं दिसंबर की आखिरी दिन में हुई थी । सिख इतिहास सिद्धांतों और परंपराओं का बलिदान महान योद्धाओं के समान अतुलनीय हैं। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष सरदार तजेंद्र सिंह बल एवं महासचिव सरदार दलविंदर सिंह ने प्रतियोगियों को पुरस्कृत करते हुए कहा कि साहिबजादो की शहादत को केवल सिख धर्म से ही नहीं जोड़ा जाना चाहिए बल्कि इसे धार्मिक आजादी का अधिकार कायम रखने में उनके असाधारण योगदान के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों को चार साहिबजादे के ऊपर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता को सफल बनाने में मलकीत कौर ,प्रीतम कौर ,गुरविंदर कौर सुखजीत कौर, अमनदीप कौर सहित कई महिलाओं की भूमिका सक्रिय रही।












