मौलाना इमदादुल रशीदी ने पेश की सच्चाई और इंसानियत की मिसाल:
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2018 के 28 मार्च के दिन को शायद ही कोई आसनसोलवासी भुला पाएगा। इस दिन सिटी ऑफ ब्रदरहुड के नाम से मशहूर आसनसोल को चंद फिरकापरस्तों ने शर्मशार किया था। 2018 के दंगों में इमाम साहब इमदादूल रशीदी ने अपने 16 वर्षीय बेटे सिगबतउल्ला राशिद को गंवाया था। आरोप है कि दंगाईयों ने पहले उनके बेटे का अपहरण किया और बाद में हत्या कर दी। इमाम साहब घटना के दिन से ही कहते आए हैं कि उन्होंने नही देखा कि किन लोगों ने उनके बेटे का अपहरण किया या उनकी हत्या की। यही वजह रही कि उन्होंने किसी के भी खिलाफ़ नामजद प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई। पुलिस ने उनके बेटे की हत्या के आरोप में दो लोगों को गिरफतार किया था । इमाम साहब ने अदालत में भी पकड़े गए दोनों आरोपियों पिंटू यादव और विनय तिवारी के खिलाफ़ गवाही नहीं दी। नतीजा यह हुआ कि आसनसोल अदालत ने दोनो आरोपियों को बेकसूर रिहा कर दिया। इमाम साहब का कहना है कि चूंकि उन्होने सच में किसी की भी उनके बेटे का अपहरण या हत्या करते नहीं देखा है तो वह अदालत में गवाही कैसे देते कि उन्होंने देखा है। यह बात वह इंसान कह रहा है जिसने अपने नौजवान बेटे को खोया है। और वह भी उनके बारे में जिनपर आरोप है कि उन्होने इमाम साहब के बेटे की हत्या की है। दरअसल यह पहला मौका नहीं है जब इमाम साहब ने सच्चाई और इंसानियत का सबक सबको दिया हो। जिस दिन उनके बेटे की हत्या हुई उस दिन भी अपने जाती दर्द को भूलकर उन्होने सबसे शांति की अपील की थी ताकि जो दुख उनको झेलना पड़ा है वह किसी और को न झेलना पड़े। और अब भी उन्होंने ऐसी ही नज़ीर पेश की। उन्होने कहा कि जब उन्होने अपनी आंखों से कुछ देखा नहीं है तो वह कैसे झूठी गवाही दे दें?
इमदादुल रशीदी जैसे इंसानों की वजह से आज भी यह दुनिया कायम है जो अपने नौजवान बेटे को खोने का दर्द झेल कर भी सच्चाई और इंसानियत के रास्ते पर अडिग रहते हैं।












