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कुल्टी में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर भाजपा ने मनाया बलिदान दिवस

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कुल्टी :कुल्टी विधानसभा के सीतारामपुर स्थित बूथ नंबर 24 में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ ने डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पुण्यतिथि पर बलिदान दिवस पालन किया गया। उक्त डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान दिवस पर उपस्थित थे कुल्टी विधानसभा के इंचार्ज संजय पाल, कुल्टी विधानसभा के समाजसेवी सह भाजपा जिला मिडिया जॉइंट इंचार्ज एवं मंडल के उपाध्यक्ष टिंकू वर्मा, कुल्टी मंडल 4 के महासचिव सोमेन चक्रवर्ती, कोषाध्यक्ष मुकेश श्रीवास्तव, बूथ के कार्यकर्त्ता टिंकू बर्मन, परितोष मंडल, ब्रह्मदेव रजक, बूथ अध्यक्ष ऋषि कुमार, दिनेश बर्मन के साथ कई पार्टी कार्यकर्त्ता थे। बलिदान दिवस पर कुल्टी विधानसभा इंचार्ज संजय पाल ने कहा अगस्त 1947 को स्वतंत्र भारत के प्रथम मंत्रिमंडल में एक गैर-कांग्रेसी मंत्री के रूप में उन्होंने वित्त मंत्रालय का काम संभाला। डॉ. मुखर्जी ने चितरंजन में रेल इंजन का कारखाना, विशाखापट्टनम में जहाज बनाने का कारखाना एवं बिहार में खाद का कारखाने स्थापित करवाए। उनके सहयोग से ही हैदराबाद निजाम को भारत में विलीन होना पड़ा। 1950 में भारत की दशा दयनीय थी। इससे डॉ. मुखर्जी के मन को गहरा आघात लगा। उनसे यह देखा न गया और भारत सरकार की अहिंसावादी नीति के फलस्वरूप मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देकर संसद में विरोधी पक्ष की भूमिका का निर्वाह करने लगे। एक ही देश में दो झंडे और दो निशान भी उनको स्वीकार नहीं थे। अतः कश्मीर का भारत में विलय के लिए डॉ. मुखर्जी ने प्रयत्न प्रारंभ कर दिए। इसके लिए उन्होंने जम्मू की प्रजा परिषद पार्टी के साथ मिलकर आंदोलन छेड़ दिया। भाजपा कुल्टी विधानसभा के उपाध्यक्ष सह समाज सेवी जिला मिडिया जॉइंट इंचार्ज टिंकू वर्मा ने कहा डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुख़र्जी के कारण आज हमारे भारत के नक्से में पश्चिम बंगाल का विलय हो पाया था। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्वरप्रथम विरोध किया था एक देश में एक सविधान एक निशान होना चाहिए। डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने धारा 370 का विरोध किया था। आज वर्तमान में भाजपा सरकार ने जम्मू कश्मीर में 370 धारा को निरस्त कर दिया हैँ। जम्मू कश्मीर में भारत सरकार मोदी सरकार ने कई अच्छे योजनाओं से लोगों को लाभ पहुंचा रहे हैं। भाजपा नेता सह समाज सेवी श्री वर्मा ने कहा
8 मई 1953 को जम्मू के लिए कूच किया। सीमा प्रवेश के बाद उनको जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। 40 दिन तक डॉ. मुखर्जी जेल में बंद रहे और 23 जून 1953 को जेल में उनकी रहस्यमय ढंग से मृत्यु हो गई। भाजपा नेता सह समाज सेवी श्री वर्मा ने कहा केवल जीवन के आधे ही क्षण व्यतीत हो पाए थे कि हमारी भारतीय संस्कृति के महापुरुष अखिल भारतीय जनसंघ के संस्थापक तथा राजनीति व शिक्षा के क्षेत्र में सुविख्यात डॉ. मुखर्जी की 23 जून, 1953 को मृत्यु हो गईं। बंगभूमि से पैदा डॉ. मुखर्जी ने अपनी प्रतिभा से समाज को चमत्कृत किया।

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