विभिन्न मांगों के समर्थन में आज वामपंथी संगठनों ने किया जिला शासक अभियान
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आसनसोल :आसनसोल के पूर्व सांसद वंश गोपाल चौधरी के नेतृत्व में आज वामपंथी श्रमिक संगठन सीटु एआईकेएस खेत मजदुर और बस्ती फेडरेशन की तरफ से जिला शासक दफ्तर अभियान चलाया गया इसमें बड़ी संख्या में इन संगठनों के कार्यकर्ता उपस्थित थे जिन्होंने अपने विभिन्न मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और जिला शासक दफ्तर तक रैली निकाली इस बारे में वंश गोपाल चौधरी ने कहा कि इससे पहले स्थानीय स्तर पर पंचायत और नगर निगमों को ज्ञापन सोपा गया है। 20 तारीख को कोलकाता के ब्रिगेड में वामपंथियों का बड़ा समावेश है उससे पहले आज पश्चिम बर्धमान जिला शासक दफ्तर तक एक अभियान चलाया जा रहा है इसके जरिए वामपंथी विभिन्न मांगों की तरफ प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं इसमें केंद्र सरकार की नीति के कारण इस क्षेत्र में जो कारखाने बंद हो चुके हैं उनको खोलना राष्ट्रीय संसाधनों को निजी हाथों में सौंपने की नीति का विरोध तथा माइक्रोफाइनेंस के नाम पर महिलाओं को जो ठगा जा रहा है उसे रोकने की मांग की जा रही है इसके अलावा इस पूरे क्षेत्र में कोयला बालू सहित अन्य अवैध गतिविधियों पर नकेल कसने की भी मांग की जा रही है उन्होंने कहा कि वामपंथियों की तरफ से लगातार इन सभी मुद्दों पर आंदोलन किया जाता रहा है और 20 तारीख को ब्रिगेड मैदान में इन सभी मुद्दों पर एक बहुत बड़ा समावेश किया जाएगा। आज के इस अभियान में हाल ही में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी में शामिल मीनाक्षी मुखर्जी भी उपस्थित थीं। उन्होंने पत्रकारों से बात की। उनसे पूछा गया कि आज सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के उस आदेश को खारिज कर दिया गया जिसमें सुपरन्यमेररी पोस्ट बनाने के लिए सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था। इस पर मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि मसला यह नहीं है कि किसने किसके आदेश को खारिज किया मामला या असली मुद्दा यह है कि बंगाल में शिक्षा का भविष्य क्या होगा उन्होंने कहा कि यह बंगाल का बच्चा-बच्चा जानता है कि मध्य शिक्षा परिषद एसएससी और पश्चिम बंगाल शिक्षा दफ्तर द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति में घोटाला हुआ है लेकिन अदालत के चक्कर और अतिरिक्त पद निर्माण जैसे मामलों में उलझ कर उन योग्य शिक्षकों और उनके परिवारों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने कोई गलत ही नहीं की थी इतना ही नहीं मीनाक्षी मुखर्जी ने कहा कि बंगाल में शिक्षा दफ्तर द्वारा आरएसएस को अपने स्कूल खोलने की इजाजत दी गई थी उनको मध्य शिक्षा परिषद का सिलेबस ही पढ़ाना था लेकिन देखा जा रहा है कि आरएसएस द्वारा उनके अपने विचारों को स्कूलों के माध्यम से विद्यार्थियों तक पहुंचा जा रहा है कि यह मामला सिर्फ कुछ योग्य शिक्षकों को प्रतारित करने तक सीमित नहीं है यह मामला पश्चिम बंगाल के शिक्षा और उसके भविष्य का है












