आसनसोल टाईम्स के साथ घरेलू बातचीत में अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी और समाज सेवी फिरोज खान एफके ने कई मुद्दों पर की चर्चा:
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आसनसोल :आसनसोल टाइम्स के चीफ एडिटर बिरजीश इलाही अंसारी और सब एडिटर बापी बनर्जी ने आज अन्तर्राष्ट्रीय व्यवसायी और समाज सेवी फिरोज खान एफके से उनके घर में मुलाकात के इस दौरान उनसे देश और दुनिया के विभिन्न मुद्दों पर काफी लंबी बातचीत हुई। फिरोज खान एफके ने देश और दुनिया के विभिन्न समस्याओं और उनके समाधान को लेकर अपनी राय जाहिर की उन्होंने आसनसोल के परिपेक्ष में जिस एक मुद्दे पर सबसे ज्यादा जोर दिया और उसके समाधान के लिए जल्द से जल्द कदम उठाने की बात कही वह थी युवा समाज का नशे की तरफ झुकाव फिरोज खान एफके ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की के आसनसोल के कई इलाकों में नशे का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है और इस क्षेत्र के कई इलाकों में युवा नशे की गिरफ्त में जा चुके हैं हालांकि उन्होंने इस बात पर भी संतोष और खुशी व्यक्त की की आसनसोल दुर्गापुर पुलिस कमिश्नरेट की तरफ से लगातार नशे के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है और इससे पहले के मुकाबले स्थिति में काफी सुधार भी आया है लेकिन उन्होंने जिस एक बात पर जोर दिया वह है जनता की जागरूकता उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन तो अपना काम कर ही रही है और आगे भी करती रहेगी पुलिस द्वारा जिस तरह के कदम उठाए गए हैं वह काफी सराहनीय है और उनको पूरा भरोसा है कि अगर पुलिस ने अपने सख्ती को बरकरार रखा तो नशे के कारोबारीयों की खैर नहीं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने लोगों की जागरूकता पर भी जोर दिया उन्होंने कहा कि खास करके कम उम्र के जो बच्चे हैं उनके माता-पिता को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है कि वह किन से मिल रहे हैं उनके दोस्त किस तरह के हैं घर से बाहर जाते हैं तो वह कहां समय बिताते हैं इन सब चीजों पर नजर रखने की बहुत ज्यादा जरूरत है क्योंकि कम उम्र के बच्चों को बहुत आसानी से गलत रास्ते पर ले जाया जा सकता है यह वह उम्र होती है जब एक बच्चा किसी के भी बहकावे में आ जाता है ऐसे में 14 15 साल के बच्चों पर उनके माता-पिता को खास तवज्जो देने की जरूरत है ताकि वह गलत संगत में ना पड़ जाए। फिरोज खान एफके ने कहा कि अगर माता-पिता और समाज जगरूक होता है तो कभी कोई बच्चा या युवा नशे का आदी नहीं हो सकता। उन्होंने इसके लिए सामाजिक परिवर्तन को भी कुछ हद तक जिम्मेदार ठहराया उन्होंने कहा कि पहले अगर मोहल्ले के किसी व्यक्ति जिसे बच्चे चाचा ताउ या मामा कहते थे वह भी अगर बच्चे को मोहल्ले में या कहीं और कोई गलत काम करते देख लेते थे तो वह उसे अपना बच्चा समझ कर अधिकार के साथ डांट दिया करते थे कभी-कभी एक दो थप्पड़ भी रसीद कर दिया करते थे और वह बच्चा हिम्मत करके अपने घर में यह बात बता भी नहीं पाता था इसलिए बच्चों के अंदर बचपन से ही अनुशासन रहता था लेकिन आज वह हालत नहीं है आज अधिकतर मोहल्ले में किसी को किसी से कोई लेना-देना नहीं है शहरों में तो यह आलम है कि आपके बगल के फ्लैट में कौन रह रहा है यह भी आपको नहीं पता ऐसे में बच्चे सही चीज सीख नहीं पा रहे हैं। फिरोज खान एफके ने कहा कि कानून तो अपना काम जरूर करेगी और कर भी रही है लेकिन नशै जैसी गंभीर समस्या से अगर निकालना है तो सिर्फ कानून के भरोसे बैठे रहने से नहीं होगा समाज और आम लोगों को भी अपने जिम्मेदारी निभानी होगी उन्होंने इस दिशा में मीडिया की भूमिका पर भी काफी जोर दिया उन्होंने कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आजकल कुछ बड़े-बड़े फिल्मी कलाकार पान मसाला जैसे खतरनाक चीजे का प्रचार करते हैं यह बच्चों के कोमल मन पर दुष्प्रभाव डालता है। यह फिल्मी कलाकार छोटे बच्चों के लिए या फिर युवाओं के लिए उनके आदर्श होते हैं ऐसे में इन फिल्मी कलाकारों को भी यह बात समझनी चाहिए कि वह पान मसाला जैसी चीजों का विज्ञापन करके चंद पैसे तो जरुर कमा लेंगे लेकिन उनकी इस हरकत से समाज पर कितना प्रतिकूल असर पड़ेगा यही वजह है कि उन्होंने मीडिया से आग्रह किया कि वह इन चीजों को दिखाएं और समाज को हर तरह के नशे के दुष्प्रभाव के बारे में ज्यादा से ज्यादा जागरूक करें












