दामोदर से धड़ल्ले से चल रहे अवैध बालु खनन के कारण शिल्पांचल में मंडरा रहा है जल संकट का खतरा:
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रानीगंज :रानीगंज में कुछ नदियों के पानी के सहारे ही नदी किनारे बसे लोगों का जीवन चलता है। इन नदियों से ही ग्रामीण अपनी रोजमर्रा का काम चलाते हैं। इसमें दामोदर नदी सबसे बड़ी नदी है। दामोदर नदी से ही आसनसोल नगर निगम, दुर्गापुर नगर निगम या सरकार के पीएचई विभाग पानी की आपूर्ति करती है। लेकिन अब देखा जा रहा है की नदियों में पानी का स्तर कम होता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इसकी सबसे बड़ी वजह बालू तस्करी है। सरकारी नियम के हिसाब से नदियों को सफाई करने का कार्य पीछले डेढ़ वर्षों से किया जा रहा है। इस बीच में सरकारी नियमों को अंगूठा दिखाकर बालू तस्करों द्वारा धडल्ले से बालू तस्करी की जा रही है, जिस वजह से नदियों के पानी का बहाव कम होता जा रहा है। नदियों का बहाव रुक जा रहा है, जिससे नदियों में प्रदूषण फैल रहा है। नदियों से बालु निकाल लेने के विषय पर जानेमाने डॉक्टर कल्याण बनर्जी ने कहा की जिस तरह से नदियों से बालु निकाल लिया जा रहा है, उससे आने वाले दिनों में आसनसोल शिल्पांचल में पानी का गहरा संकट आने वाला है। इस पर कई स्थानिय लोगों का भी कहना है कि नदियों से भारी मात्रा में बालू को निकाल लिया जा रहा है, जिससे पानी की बड़ी समस्या आने वाला है। रानीगंज अंचल में दामोदर नदी के किनारे स्थित गांव तिराट गांव है, यहीं पर तिराट बालू घाट चलता है। बड़ी बड़ी जेसीबी मशीनों द्वारा यहां से बालु उठाने का कार्य हो रहा, जहां पर सैकड़ो की संख्या में प्रतिदिन ट्रको के जरीए नदी से बालू बाहर भेजा जा रहा है। तिराट गांव के रहने वाले जितेन हालदार ने आरोप लगाया कि पहले नदियों में जिस तरह से पानी का स्तर रहता था, उससे अब जल स्तर काफी कम हो चुका है। साथ ही पहले से पानी दूषित भी अधिक हो चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह है की नदियों से बालू की निकासी हो रही है। नदियों से बालू निकालते निकालते नदियों की दुर्दशा खराब हो चुकी है। हम गांव वाले लोग ज्यादातर नदी के पानी के ऊपर ही निर्भर करते हैं। लेकिन अभी जिस तरह से बालू की निकासी एवं चोरी हो रही है, आने वाले दिनों में हम लोगों को इस क्षेत्र में पानी के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। वहीं तिराट इलाके की रहने वाली सुखमणि देवी ने कहा कि हम लोगों को पानी के लिए काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इतनी बड़ी गांव के पास सटी नदी है, फिर भी पानी में दिक्कत होती है। पहले नदियों का पानी हम लोग व्यवहार करते थे, लेकिन अब पानी का स्तर भी कम हो चुका है और इसके साथ-साथ नदियों का पानी भी दूषित हो रहा है और यहां पर बालू भी उठा लिया जा रहा है। जिसके कारण हम लोगों को कई तरह के समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बड़े बड़े ट्रकों के ओवरलोड़ चलने के कारण ग्राम की जो सड़क है वह पूरा पूरी टूट चुकी है। बड़े-बड़े वाहन चलते हैं जिससे हम लोगों को सड़क पर चलना या हमारे स्कूल के बच्चे जब पढ़ने जाते हैं स्कूल में उनको दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है। वहीं इस विषय पर तिराट ग्राम पंचायत के प्रधान शिवदास चटर्जी ने कहा कि प्रशासन को इस विषय में हम लोगों ने बार-बार लिखित शिकायत की है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जिस तरह से बालू उत्खनन किया जा रहा है, बहुत ही जल्दी इस क्षेत्र में पानी की गंभीर समस्या पैदा हो जाएगी। बालू निकासी का जो कार्य है वह अवैध तरीके से ही चल रहा है। हम लोगों ने कई बार इसके खिलाफ आंदोलन किया। इसके साथ-साथ बड़े-बड़े वाहन के जरिए दामोदर तिराट घाट से बालू का उठाव चल रहा है। जल्द ही क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न होने के साथ नदी अपनी वास्तविक रुप रेखा खो देगी। दूसरा सबसे बड़ा और एक कारण है कि यहां पर इस क्षेत्र में जो बालू निकासी हो रही है , वह कच्ची सड़क के जरिए हाईवे पर जाती है। हमारे गांव के क्षेत्र में जब बालू की निकासी होती है तो बड़े-बड़े वाहन के जरिए बालू ग्राम के मुख्य सड़कों से जाती है। जिसके कारण सड़कों की खस्ता हाल हो जाती है। इस दिशा में प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरूरत है।












