प्रधानमंत्री का माफीनामा देशहित में उठाया गया एक कदम- सुरेन जालान
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आसनसोल टाइम्स : बीते 19 तारीख को यानी गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के दिन देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के लोगों से किसान बिलों को रद्द करते हुए माफी मांगी । विपक्ष इसे जनांदोलन के समक्ष नरेन्द्र मोदी सरकार का झुकना बता रही है लेकिन आसनसोल के विशिष्ट उद्योगपति सुरेन जालान इसे देशहित में उठाया गया एक समयोचित कदम मानतें हैं । सुरेन जालान का मानना है कि देश की अखंडता के लिए विघटनवादी ताकतों को किसान आंदोलन के नाम पर ताकत मिलता देख देशहित के लिए प्रधानमंत्री ने प्रकाश पर्व के दिन किसान बिल को रद्द किया एवं देश से माफी मांगी । हालांकि उन्होंने यह कहीं नहीं कहा कि बिल में त्रुटी थी । प्रधानमंत्री ने कहा कि वह किसानों को दीपक की रौशनी जैसी स्पष्ट बात को भी समझा नहीं पाए इसके लिए वह माफी मांग रहें हैं । देखा जाए तो यह उस दंतकथा के हमारे प्रधान को पुनः मूषक भव:के वरदान जैसा है । लेकिन यहां एक आशंका भी है कि 19/11/2021 के बाद जितने भी कानून देश हित के लिए बने हैं सब पर विघटनवादियों की तलवारें लटक रही हैं कि सब को वापस लो। यह तो स्पष्ट है कि यह किसान आंदोलन नहीं देश की अखंडता के लिए खतरा पैदा करता एक दिशाहीन बेलगाम आंदोलन है। जैसे दंतकथा के अनुसार मूषक को बिल्ली से डर लगता था। बिल्ली को कुत्ते से डर लगता था।कुत्ते को बाघ से डर लगता था।मुनि द्वारा उसे वरदान दिया गया ताकि उसका डर दुर हो लेकिन मुनि का वरदान मिलते ही मूषक ने मुनि की हत्या करने की ठान ली।मुनि को इस बात का आभास होते ही पूनः उसे मूषक भवःका वरदान दे दिया।आज हमारे विघटनवादीयों की स्थिति भी वैसी ही है।किसान हित आंदोलन तो एक बहाना है इनको तो बस देश को अस्थिर बनाना है । सुरेन जालान ने देशहित में छोटे एवं मझोले किसान भाइयों से अनुरोध किया कि जो देश की अखंडता की रक्षा के लिए और देशहित के लिए इस आंदोलन को 24 घंटे के अंदर ही समाप्त कर दें। उन्होंने सभी किसानों से अपील कीया की किसी भी विघटनवादी राजनीति को एवं विदेशी ताकतों को आवाज उठाने का मौका ना दें । उन्होंने राष्ट्रहित को महानतम बताते हुए देश के सच्चे किसान भाईओं को नमन किया













