देश के प्रधानमंत्री के माफीनामे को मिले यथायोग्य सम्मान – सुरेन जालान
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आसनसोल टाइम्स : केन्द्र सरकार द्वारा तीन कृषि कानुनो को रद्द करने की मांग पर पिछले करीब एक साल से किसान दिल्ली के नीकट आंदोलन कर रहे थे । आखिरकार गुरु नानक देव जी के प्रकाश उत्सव के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऐलान कर दिया कि तीनों कृषि कानुनो को निरस्त किया जाएगा । इसे लेकर आसनसोल के प्रख्यात उद्योगपति सुरेन जालान ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में देश की जनता महान एवं देशहित महान है।उनके समक्ष माफी मांगना स्वयं में महान से भी अधिक महान बलिदान है। मासूम किसानों के नाम पर राष्ट्रविरोधी ताकतों को बढ़ता देख एवं लखीमपुर में केंद्रीय मंत्री जी के बेटे द्वारा घटित घटना के कारण इस आंदोलन को देश की अखंडता के लिए एवं देश विरोधियों की ताकतों को बढ़ते हुए देख देश के प्रधान ने जो माफी मांगी वह ना केवल किसान बिल के लिए था बल्कि वह राष्ट्रहित के लिए एक सच्चा बलिदान है। उन्होंने इस माफी को साहसिकपूर्ण एवं प्रकाश पर्व पर देश की अखंडता के लिए बलिदान बताया । उन्होंने बताया कि यह माफी किसानों के लिए है।जो इस बिल को समझ ना सके वहीं राष्ट्रविरोधी ताकतों के गलत इरादों की हार है।देश की आर्थिक प्रगति एवं किसान भाइयों की प्रगति को झटका है। उन्होंने आशा जताई कि शीतकालीन संसद सत्र शुरू होने पर पक्ष और विपक्ष मिलकर देश की अखंडता पर एवं देश की प्रगति पर विचार करेंगे एवं जो भी निर्णय हो किसान भाइयों के हित में वापस कर देना चाहिए या नए ढंग से सभी को मिलकर देशहित सर्वप्रथम,किसान हित वह भी सर्वप्रथम होना चाहिए।यह किसी के व्यक्तिगत वर्चस्व की लड़ाई नहीं है। देश के प्रधानमंत्री के माफीनामें को हर भाषा में सम्मान का दर्जा देना चाहिए।













