कौन बनेगा कोयलांचल में अवैध कोयला तस्करी का सिरमौर ? :
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जमुड़िया :आसनसोल तथा आसपास के इलाकों में जमीन के नीचे कोयले का भंडार है तभी इसे कोयलांचल कहा जाता है बीते लंबे समय से यहां पर कोयला उत्खनन होता रहा है और पूरे देश में आसनसोल की कोयले से ही पहचान है लेकिन यही कोयला तमाम तरह के गुनाहों को भी जन्म देता रहा है।ईसीएल द्वारा कोयले का उत्खनन तो किया ही जाता है लेकिन कोयले के अवैध कारोबारी भी धड़ल्ले से अपना काला साम्राज्य विस्तृत करते रहे हैं पिछले लंबे समय से कोयले का यह काला कारोबार चलता रहा है बीच में ईडी सीबीआई जैसे केंद्रीय जांच एजेंसीयों की सक्रियता की वजह से ऐसा लगने लगा था कि कोयले का यह काला कारोबार शायद अब बंद हो जाएगा लेकिन अगर सूत्रों की मानें तो एक बार फिर से अवैध कोयला कारोबारी अपना साम्राज्य फिर से विस्तृत कर रहे हैं सूत्रों की माने तो यह अवैध तस्कर कोयले की तस्करी का अपना काला कारोबार शुरू कर चुके हैं और जिन इलाकों में पहले कोयले की तस्करी होती थी उन इलाकों में तो हो ही रही है ऐसे कई नए इलाकों में भी यह तस्कर अपने पांव पसार रहे हैं जहां अब तक इनकी पहुंच नहीं हो पाई थी सिंडिकेट की पकड़ अब ऐसे कई इलाकों में हो चुकी है जो पहले उनकी जद से बाहर थे। सूत्रों का कहना है कि कोयला तस्करी के लिए पहले से ही कुख्यात जमुरिया में एक बार फिर से कोयला कारोबारीयों का गढ़ बनता जा रहा है सालानपुर भी कोयला कारोबारीयों से अछूता नहीं रहा यहां भी इन कोयला कारोबारीयों ने अपने साम्राज्य का विस्तार कर लिया है हालांकि इस तरह की खबरें भी छन छन के आ रही हैं की कोयला कारोबारी के दो गुटों में इस कारोबार के नियंत्रण को लेकर संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई है कोयले के अवैध कारोबार से जुड़े दोनों गुटों में से कोई भी इस लड़ाई में पीछे नहीं रहना चाहता ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है की कोयला तस्करों के बीच नियंत्रण की यह लड़ाई बहुत जल्द हिंसक रूप ले सकती है इसे लेकर अनुभवी व्यक्तियों की पेशानी पर बल भी पड़ गए हैं कहा जा रहा है की कोयला तस्करों के एक गुट को एक रसूखदार नेता का आशीर्वाद भी मिला हुआ है वहीं सालानपुर में जिस तस्कर को कोयले के उत्खनन की बागडोर सौंपी गई है वह नियमित रूप से सीबीआई अदालत में पेश होता है । इस क्षेत्र के अनुभवी लोगों का कहना है की एक तरफ जब कोयला तस्करी को लेकर केंद्रीय जांच एजेंसियां इतनी तत्पर हैं ठीक उसी समय कोयला तस्करों की यह सक्रियता कहीं ना कहीं इस बात की तरफ इशारा करती है कि इस काले कारोबार में इन तस्करों के सर पर प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों का हाथ तो जरूर है तभी यह कोयला तस्कर एक बार फिर से सक्रिय होने की हिम्मत दिखा रहे हैं












