बंगाल संविधान से चलेगा टीएमसी नेताओं की मर्जी से नहीं- जितेंद्र तिवारी
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आसनसोल :आने वाले 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल में मतदाता सूची को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच आरोप प्रत्यारोप का दौर चल पड़ा है। हाल ही में कोलकाता के नेताजी इनडोर स्टेडियम में टीएमसी के कार्यकर्ता सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया था कि बंगाल की मतदाता सूची में हरियाणा गुजरात जैसे अन्य राज्यों के लोगों के नाम शामिल कराए गए हैं उन्होंने कुछ नामों का जिक्र करते हुए यह आरोप लगाया था कि एक ही एपिक नंबर पर एक से ज्यादा लोगों के नाम दर्ज हैं वह भी विभिन्न राज्यों में ममता बनर्जी ने इसके लिए सीधे तौर पर भाजपा को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था कि मतदाता सूची में कारगुजारी करके उन्होंने जिस तरह से महाराष्ट्र और दिल्ली में जीत हासिल की थी ठीक उसी तरह बंगाल में भी करना चाहते हैं हालांकि ममता बनर्जी ने कहा था कि यह बंगाल है और यहां पर इस तरह से धोखाधड़ी करके चुनाव जीतने में बीजेपी कभी सफल नहीं होगी उन्होंने टीएमसी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिदायत दी थी कि वह फौरन इस अभियान में जुट जाएं और यह पता लगाएं कि कौन से फर्जी वोटर के नाम बंगाल के मतदाता सूची में दर्ज किए गए हैं इसे लेकर भाजपा नेता जितेंद्र तिवारी ने अपने सोशल मीडिया के जरिए एक संदेश जारी किया उन्होंने कहा कि बंगाल में टीएमसी अब उन लोगों को बंगाल में मतदाता सूची से हटाने की साजिश रच रही है जो पीढ़ीयों से बंगाल में रहते आए हैं उनका जन्म उनका काम सब कुछ बंगाल में हुआ है लेकिन आज जब ममता बनर्जी और टीएमसी को अपने पांव तले से राजनीतिक जमीन खिसकती नजर आ रही है तो वह साजिश के तहत इन लोगों के नाम मतदाता सूची से कटवाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बंगाल में भाषाई अल्पसंख्यक लोगों के साथ अत्याचार किया जा रहा है उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से भी वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। जितेंद्र तिवारी ने कहा कि बंगाल की जो आज भौगोलिक स्थिति है पहले ऐसी नहीं थी पहले बंगाल बिहार झारखंड उड़ीसा सब कुछ एक में समाहित थे धीरे-धीरे नए-नए राज्यों का गठन हुआ और आज बंगाल की भौगोलिक स्थिति को हम देख रहे हैं उस समय जो लोग बंगाल में रहा करते थे नए राज्यों के गठन के बाद कुछ लोग नए राज्यों में चले गए लेकिन बहुत से ऐसे लोग बंगाल में ही रह गए जिनकी मातृभाषा उर्दू हिंदी संथाली गुरुमुखी आदि थी उन्होंने बंगाल में ही रहना मुनासिब समझा क्योंकि उनको बंगाल की जमीन से प्यार था इसीलिए वह बंगाल में ही रह गए लेकिन अब इन भाषाई अल्पसंख्यकों को बंगाल से भागने का प्रयास किया जा रहा है। जितेंद्र तिवारी ने कहा कि टीएमसी के कुछ “टुटपुंजिया” नेता अपनी नेत्री के आदेश पर इस अभियान में जुट गए हैं और उनका कहना है कि अब वह फर्जी वोटर खोज निकालेंगे। जितेंद्र तिवारी ने साफ कहा की देश संविधान से चलेगा किसी टीएमसी नेता की मर्जी से नहीं और अगर संविधान द्वारा किसी नागरिक को मताधिकार का अधिकार दिया गया है उस अधिकार से वंचित करने की कोशिश अगर की गई तो इसका पुरजोर विरोध होगा जरूरत पड़ी तो अदालत का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा उन्होंने कहा कि यह बंगाल किसी एक विशेष राजनीतिक दल की नहीं है यह सभी की है इस पर जितना हक भाषाई अल्पसंख्यकों के खिलाफ बोलने वालों का है उतना ही हक भाषाई अल्पसंख्यकों का भी है। उन्होंने कहा कि बंगाल महापुरुषों और क्रांतिकारियों का प्रदेश रहा है बंगाल विश्व कवि रविंद्रनाथ टैगोर ईश्वर चंद्र विद्यासागर जैसे महापुरुषों की धरती है यहां पर यह लोग सभी को अपने अंदर समाहित करने की बात किया करते थे लेकिन आज देखा जा रहा है कि सिर्फ भाषा के आधार पर कुछ लोगों को दरकिनार करने का प्रयास किया जा रहा है उन्होंने कहा कि अन्य देश से आए रोहिंग्या मुसलमान को यहां की नागरिकता देने के लिए टीएमसी भरसक प्रयास कर रही है जबकि इस धरती पर जन्म लेकर इस धरती को अपना मानकर अपनी कर्म भूमि बनाने वाले भाषाई अल्पसंख्यकों को यहां से भागने की कोशिश की जा रही है उन्होंने कहा कि यह बड़े अफसोस की बात है की हिंदी संथाली गुरुमुखी जैसी भाषा बोलने वाले लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव किया जा रहा है खासकर उन लोगों को हाशिए पर डालने की कोशिश की जा रही है जिनका कहीं ना कहीं सनातन धर्म के साथ संबंध है इतना ही नहीं उन देश प्रेमी राष्ट्रभक्त उर्दू भाषी लोगों के साथ भी इसी तरह का बर्ताव करने की कोशिश की जा रही है जो सही मायने में राष्ट्रभक्त हैं जिनको भारत पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच में भारत के हारने पर दुख होता है जितेंद्र तिवारी ने कहा कि वह भाषा के आधार पर किसी भी भाषाई अल्पसंख्यक के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे और इसके लिए सशक्त संवैधानिक लोकतांत्रिक प्रतिरोध किया जाएगा जितेंद्र तिवारी ने कहा कि जब भी चुनाव आते हैं तभी ममता बनर्जी अपने आप को हिंदी भाषी संथाली भाषी मतुआ अनुसूचित जाति जनजाति सभी की नेतृ के तौर पर स्थापित करने की कोशिश करती है लेकिन जब चुनाव नहीं रहते तब उन्हीं लोगों को बंगाल से भागने की साजिश में जुट जाती हैं। जितेंद्र तिवारी ने कोलकाता के बेर फिरहाद हकीम द्वारा घर-घर जाकर फर्जी वोटर जानने के लिए सर्वेक्षण करने की बात पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर कोलकाता के मेयर को सर्वेक्षण करना है तो इस बात का करें कि कोलकाता के लोग टैक्स देने के बावजूद भी नागरिक सुविधाओं से क्यों वंचित हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि उन्हें किसी सेबी सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं है सर्टिफिकेट लेना ही है तो भाषाई अल्पसंख्यक संविधान से सर्टिफिकेट लेंगे












