कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर आसनसोल नगर निगम के हिंदी अकादमी की तरफ से दी गई श्रद्धांजलि:
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आसनसोल :आसनसोल नगर निगम की तरफ से आज महान कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर आसनसोल नगर निगम के निकट चौराहे पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया इस मौके पर यहां आसनसोल नगर निगम के चेयरमैन अमरनाथ चटर्जी एमएमआईसी गुरदास चटर्जी आसनसोल नगर निगम के हिंदी अकादमी के वाइस चेयरमैन दिव्येंदु भगत सचिव भोला कुमार हेला संयोजक दिनेश पांडे इस क्षेत्र के सुप्रसिद्ध साहित्यकार मनोज यादव विशिष्ट उद्योगपति और समाजसेवी पवन गुटगुटिया मधु डुमरेवाल के अलावा शहर के तमाम साहित्यकार आसनसोल नगर निगम के अधिकारी और अन्य विशिष्ट व्यक्ति उपस्थित थे यहां पर सभी ने मुंशी प्रेमचंद की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित कि इस मौके पर अपना वक्तव्य रखते हुए अमरनाथ चटर्जी ने कहा की मुंशी प्रेमचंद एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से समाज की कुरीतियों को उजागर किया उन्होंने दबे कुचले वंचित वर्ग की कठिनाइयों को अपनी लेखनी के माध्यम से सबके सामने प्रस्तुत किया और तत्कालीन भारतीय समाज के तथाकथित ठेकेदारों से कुछ बेहद कठिन सवाल पूछे अपनी लेखनी से उन्होंने समाज के उस अंधकार पहलू को सबके सामने उजागर किया जिसे सब देखकर भी अनदेखा करने की कोशिश कर रहे थे उन्होंने समाज में सही मायने में सभी के लिए समान अधिकार लाने की कोशिश की चाहे वह दलित वर्ग के लोग हो या महिलाएं हो। अमरनाथ चटर्जी ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानी आज भी प्रासंगिक है और जब तक समाज के हर एक व्यक्ति को उनके समान अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता मुंशी प्रेमचंद और उनकी रचनाओं की प्रासंगिकता कभी समाप्त नहीं होगी वही अपने वक्तव्य में दिव्येंदु भगत ने भी मुंशी प्रेमचंद को सिर्फ एक साहित्यकार नहीं समाज सुधारक की आख्या दी उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियों में तत्कालीन भारतीय समाज का सही चित्र उभर कर सामने आता था जिसमें लोगों की कठिनाइयां परेशानियां स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानियां आज भी प्रासंगिक है क्योंकि आज भी समाज से भेदभाव पूरी तरह से दूर नहीं हुआ है। वही गुरदास चटर्जी ने भी मुंशी प्रेमचंद की जीवनी और उनके लेखन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद की जीवनी और लेखन से अभी भी बहुत कुछ सीखने को है और उन्होंने हमेशा समाज के वंचित वर्ग की परेशानियों को ही अपनी लेखनी का मूल आधार बनाया है आसनसोल नगर निगम की तरफ से हमेशा देश के अग्रणी महापुरुषों की पुण्यतिथि और जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है वही आसनसोल नगर निगम के हिंदी अकादमी के सचिव भोला हेला ने भी मुंशी प्रेमचंद के जीवन और उनके लेखनी को याद करते हुए कहा कि चाहे गोदान हो या पुस की रात या अन्य कोई रचना उनकी हर रचनाओं में तत्कालीन भारतीय समाज कि वह तस्वीर सामने उभर कर आती है जिसमें एक वर्ग विशेष को दबाकर रखा जाता था उन पर अत्याचार किए जाते थे सामंतवाद और जमींदारी प्रथा के चलते उन पर तमाम तरह की अत्याचार होते थे उन्होंने कहा कि मुंशी प्रेमचंद की कहानी और उनमें छलकता दर्द आज भी उतना ही प्रासंगिक है और जब तक हम इसे पूरी तरह से दूर नहीं कर लेंगे मुंशी प्रेमचंद हमारे लिए सदैव प्रासंगिक बने रहेंगे












