मीता राय बनीं तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत:
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आसनसोल :शिल्पांचल में मीता राय आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। शिक्षा के साथ साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी जो पहचान बनाई है वह अनुकरणीय है। मीता राय ने उस कहावत को सच कर दिखाया कि पूर्ण आत्मविश्वास तथा सच्ची लगन से की जाने वाली मेहनत कभी व्यर्थ नहीं जाती। अपने जीवन के अभी तक के सफर के बारे में मीता राय ने बताया कि आज से कुछ साल पहले महज 100 बच्चों को लेकर उन्होंने एक स्कूल की शुरुआत की जहां वह विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार देने के लिए भी सदा परिश्रम करती रही। आज इसी का नतीजा है कि 100 से बढ़कर उनके स्कूल में करीब 2 हजार के आसपास बच्चे पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि संगीत में भी उनकी बचपन से ही रुचि रही है और आज भी अपनी तमाम व्यस्तताओं के बाद भी वह संगीत की सेवा करती हैं। वहीं समाजसेवा में भी उनकी खासी दिलचस्पी है। जिन जरूरतमंद परिवारों के बच्चों के पास किताब या स्कूल यूनिफॉर्म के पैसे नही होते उनके लिए वह खुद इन चीजों का इंतजाम करती हैं। साथ ही वह समय समय पर विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित करती रहती हैं जिससे बच्चों का सर्वांगीण विकास हो। यही वजह है कि ईश्वर के आशीर्वाद से आज शिल्पांचल में दो नामी स्कूलों का वह संचालन कर रहीं हैं। इसके अलावा भी विभिन्न सामाजिक संगठनों की भी मुख्य पदाधिकारी के रूप में उनको लोगों की सेवा करने का अवसर मिलता है। मीता राय का कहना है कि लोग अक्सर कहते हैं कि हर सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है लेकिन उनकी सफलता के पीछे उनके पति और शिल्पांचल के प्रख्यात व्यवसाई तथा समाजसेवी सचिन राय का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि वह आज जिस मकाम पर भी है उसके पीछे उनके पति का शत प्रतिशत योगदान है। उन्होंने कहा कि ईश्वर से उनकी प्रार्थना है कि वह ऐसे ही लोगों की सेवा करती रहें ताकि वह आजीवन लोगों की सेवा करती रहें












