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शतरंज खेल को बढ़ावा देने के लिए प्रति सप्ताह हो रहा शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन:

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आसनसोल :आसनसोल के बीएनआर स्थित एक होटल के हॉल मे शतरंज के कुछ खिलाडियों ने शिल्पाँचल से विलुप्त हो रही शतरंज के खेल को बढ़ावा देने के लिए अपनी एड़ी चोटी एक कर मैदान मे उतर चुके हैं, शतरंज खेल के प्रति रूचि रखने वाले दिनेश प्रशाद की अगर माने तो शतरंज का खेल प्राचीन भारत से जुड़ी है, इस खेल को महाभारत के समय से खेला जा रहा है, शतरंज खेल की शुरुआत पहले भारत से ही शुरू हुई जिसके बाद यह खेल ईरान और फिर अन्य देशों मे खेला जाने लगा और देखते ही देखते यह खेल पुरे देश मे प्रचलित हो गया, वह कहते हैं की यह खेल एल माइंड गेम है, प्राचीन काल के राजा महराजा शतरंज के खेल के जरिए ही युद्ध मे अपने दुश्मनों को पराजित करने की योजना तैयार करते थे, शतरंज खेलने से बुद्धि की विकाश भी होती है, ऐसे मे अगर हम आसनसोल की बात करें तो यहाँ शतरंज के खिलाड़ी गिने चुने ही हैं और समय की व्यस्थता होने के कारण वह खुद कुछ इस कदर वयस्थ रहते हैं की उनके पास शतरंज खेलने के लिए समय नही बचता ऐसे मे इस खेल को बढ़ावा देने व इस खेल के साथ अन्य लोगों को भी जोड़ने की प्रयास कर वह सप्ताह मे एक दिन हर रविवार को शतरंज प्रतियोगिता का आयोजन करवा रहे हैं, जिस प्रतियोगिता मे जितने वाले प्रतिभागी को उपहार भी दिए जाने की बात कही जा रही है, उन्होने कहा शतरंज की प्रतियोगिता का तीन सप्ताह हो गया लोग इस खेल से जुड़ रहे हैं साथ ही शतरंज प्रतियोगिता मे भाग भी ले रहे हैं, उन्होने कहा इस खेल को खेलने के लिए उम्र की कोई लिमिट नही है, हर उम्र के लोग इस खेल को खेल सकते हैं, अगर कोई इस खेल को खेलना नही जानता तो वह बकायादा उन्हें इस खेल को अच्छी तरह सिखाएंगे साथ मे उन्हें प्रतियोगिता मे भाग लेने का मौका भी देंगे

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